Author Topic: मेरे दिल की कश्ती  (Read 886 times)

Offline aditya joshi

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मेरे दिल की कश्ती
« on: February 06, 2015, 07:20:42 PM »
मेरे दिल की कश्ती

मेरे दिल की कश्ती मे कोई रहता था 
नाजाने वो क्या कहता था
तुम हस्ती हुई बहुत अच्छी लगती हो
ना जाने तुम मुझे अपनी सी क्यु लगती हो
एक दिन ऐसा हुआ
मै अपनी उजरी बस्ती मै कामियाब हुआ
तब दिल  मेरा हैरान हुआ
तब ना जाने वो मुझे अनंजना सा क्यु हुआ
जिसे मान था अपना दिलबर वही दिल का मेहमान हुआ
मेहमान तो आते जाते रहते
पर उस दिलबर के कारन
इस दिल का खूब नुकसान हुआ..........




कवि : आदित्य जोशी
        9967904749

Marathi Kavita : मराठी कविता

मेरे दिल की कश्ती
« on: February 06, 2015, 07:20:42 PM »

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