Author Topic: दास्तान-ए-मोहब्बत  (Read 918 times)

Offline dattarajp

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दास्तान-ए-मोहब्बत
« on: April 10, 2015, 04:42:26 PM »
दास्तान-ए-मोहब्बत

तेरे घर के सामने
जो डोली सज रही हैं
ओ मुझे मेरे जनाजे के जैसी
क्यू लग रही हैं

कहते हैं दुनियाँवाले बेवफा तुझे
पर आभि कुछ वफा बाकी है
तुझ मे मेरे ख़ातिर

तू मुझको सौ बार आवाज़
देने के बाद भी मै नही आऊँगा
तुजको ही आना होगा मेरे कबर पर
एक फूल रख कर दो आँसू बहाकर
तुझको भी वापस जाना होगा

मै खुदासे बस यहीं दुवा करता रहुँगा
एक पल तो मै तेरे यादों मैं आता रहूंगा
पलकों मे तेरी दो आँसू  मेरे याद के मैं लाता रहूंगा

                                     कवी-पंकज
                                8180931978


Marathi Kavita : मराठी कविता

दास्तान-ए-मोहब्बत
« on: April 10, 2015, 04:42:26 PM »

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