Author Topic: बेइम्तेहा....  (Read 1434 times)

Offline Chottya

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बेइम्तेहा....
« on: August 22, 2015, 01:20:16 PM »
मान जाने और मनाने मे फर्क बहोत है...
हसने और मुस्कुराने में फर्क बहोत है...
हस्तिया मिट गई इश्क की बेगारी में....
बेवफाई के आशियाने बहोत है....

-Chottya... ;)

Marathi Kavita : मराठी कविता


gunvant vikhar

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Re: बेइम्तेहा....
« Reply #1 on: August 31, 2015, 07:05:10 PM »
nice

Offline Chottya

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Re: बेइम्तेहा....
« Reply #2 on: September 02, 2015, 12:02:27 PM »
 :)