Author Topic: भ्रष्ट  (Read 1212 times)

Offline shreee

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भ्रष्ट
« on: November 14, 2011, 11:41:20 AM »
आयुष्यभर कष्ट करुन,
आपन असेच नष्ट होनार..
लाज अब्रू वेशीला टांगत,
एके दिवशी भ्रष्ट होनार..

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