Author Topic: प्रणय  (Read 1749 times)

Offline kumudini

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प्रणय
« on: May 04, 2012, 11:40:01 AM »
प्रणय
गंधात गंध निशिगंध
बेदुंध होऊनी आला
डोय्रात प्रीत ओठाथ गीत घेउनी
नीज सखीला खुलवायला
बेदुंध होऊनी आला
हा निशिगंध सुकुमार
ही  रातराणी हळुवार
लाजुनी मिटे पापणी
बिलगली लीन होऊनी
विसरुनी सर्व विश्वाला

प्रणयात हरपूनी होश
जाहला असा मदहोश
हातात हात गुंफुनी
घेउनी कवेत तीजसेकानी
प्रणय गीत गुणगुणला

ही आशी कावरी हूउनी बावरी
सादात साद मिसळूनी
धन्यता पाऊनि
रोम रोम बहरला
                                                 कुमुदिनी कालीकर

Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline jyoti salunkhe

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Re: प्रणय
« Reply #1 on: May 04, 2012, 12:16:58 PM »
Nice Poem :)