Author Topic: ------ घन बरसत -------  (Read 1123 times)

Offline Ambarish Deshpande

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------ घन बरसत -------
« on: March 20, 2013, 08:36:44 PM »
घन बरसत नित तळपत बिजली
मन विचलीत ही तळमळ कसली
शाम-मेघना, शामल सजना
कोमल प्रिती, सूख वेदना
राह तकत, यांदे गहिवरली


सावन जलती आग तनावर
रोखुं कैसे भाव अनावर
ईंद्रधनुवर, चिंब सरीतुन
कैसे जोगन, ढुंढे साजन
गात्र तुझ्या गंधाने सजली..
घन बरसत....


साजन संग ये, जग बिसरावे
मुक्त आसवे, नयनी यावे
संग सुखाचा देह-मनातुन
जगले मीलन, सरसरला क्षण
आग तुझ्या स्पर्शातुन विझली.

घन बरसत नित तळपत बिजली

अंबरीष देशपांडे

Marathi Kavita : मराठी कविता

------ घन बरसत -------
« on: March 20, 2013, 08:36:44 PM »

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Offline केदार मेहेंदळे

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  • मला कविता शिकयाचीय ...
Re: ------ घन बरसत -------
« Reply #1 on: March 21, 2013, 10:52:13 AM »
kya bat.... tal ani lay shbdan madhunach milate....

 

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