Author Topic: थेम्बासम वाटे करावा प्रवास  (Read 2950 times)

Offline amoul

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 तुझ्या  केसांत  ओल्या  वाहत्या  नदीचा  भास,
निसटत्या  थेम्बासम  वाटे  करावा  प्रवास.
कधी  वाटे ओघळावे  तुझ्या  गालावर,
कधी  घ्यावा  झोका  कानी  कुंतलांना,
तुझ्या  झुमक्यांना  घेऊन गिरकी,
भिजवावं  तुझ्या  उतरत्या  खांद्यांना.
वा  उतरावं  मानेमागून  थेट  पाठीवर,
मदनाला  व्हावा हेवा  थेंबाच्या  नशिबावर.
कधी  उतरावं  मानेवर  तिथून  गुप्त  प्रवास,
सरकन निथळत  जावं भिडावं  उरास.
एक  थेंब  विरघळावा  तुझ्या  नाळेपाशी जरा,
जन्माची  भेट  व्ह्वावी  जिथे  असते  परा.
पुढचा  प्रवास  शब्दात  न  सांगता  येण्यासारखा,
शब्दाहून  निराळा आणि शब्दांना  पारखा.
एक  थेंब  जाऊन  विरावा  तुझ्या  पायापाशी,
निशब्द  निस्तब्ध  उभा  मुक्तीच्या  दाराशी.
 
................अमोल
 

Marathi Kavita : मराठी कविता


Offline shashaank

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faarach sundar, alwar paddhateene maandalay......... great......

Offline केदार मेहेंदळे

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khupach mast..... komal ani surekh.

Offline swati121

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Ekadam bhari

Offline प्रशांत नागरगोजे

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Lai bhari...

Offline nirmala.

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AWSSOM

ajit khomane

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Re: थेम्बासम वाटे करावा प्रवास
« Reply #6 on: December 29, 2012, 01:53:57 PM »
KHOOPACH CHAN

Offline Swateja

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  • hi everyone.I am mad about poems.here for friends.
Re: थेम्बासम वाटे करावा प्रवास
« Reply #7 on: January 15, 2013, 11:59:10 PM »
itake alwaar kase lihita ho ? kitti sundar aahe he !