Author Topic: कफन ना ओढाना (प्रशांत शिंदे)  (Read 887 times)

कफन ना ओढाना
हमपर ऐ यारो
अब तो हमारी अर्थी
सजानी बाकी है

एक फूल आता ही होगा
हाथों में उनके

जीनसे चिता हमारी
जलनी है.....
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© प्रशांत शिंदे