Author Topic: क्या करें जनाब ये मोहोब्बत का सुरूर हैं......  (Read 883 times)

Offline Shraddha R. Chandangir

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क्या करें जनाब ये मोहोब्बत का सुरूर हैं
कमबख्त मेरे बस मे नहीं, ये दील तो मजबूर है।
मैखानो के जाम भी फीके पडने लगते हैं,
उन नशीली आखो मे नजाने क्या नूर है।

मन्नत है कीसीकी, या जन्नत की हूर है
बेशकीमती हैं वो, जैसे कोहिनूर है।
कीसको इल्जाम दे? आखिर किसका कसूर है?
आशिक है हम, माशूक तो मगरूर है।

हम वफाओ के शौकीन, उन पे हुस्न का गुरूर है
बेवफा के नाम से, वो सरेआम मशहूर हैं।
ईश्क और अश्क तो सीक्के के दो पहलू है,
ईश्कबाजी का आखिर यही दस्तूर है।

- अनामिका

Marathi Kavita : मराठी कविता


 

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