Author Topic: दुःख  (Read 892 times)

Offline dattarajp

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दुःख
« on: March 09, 2015, 02:34:18 PM »
             दुःख


दुःख आहे किती  माझा  मनात
आज कुणा  कळेल का


माझ्या या दुखाच्या समुद्रास
सुखाची  नदी येवुन  मिळेल  का
सुखाच्या या  नदीवरील  दुखाचे
बांध  तूटतिल का


दुःख आहे किती  माझा  मनात
आज कुणा  कळेल का


मझ्या या दुःखाचा अंधारात
दिवा कुणी लावेल  का
माझ्या या  दुःखी  जीवनात
सुखाचा  प्रकाश आज पडेल का


दुःख आहे किती  माझा  मनात
आज कुणा  कळेल का


दुखाला या माझ्या  मनातून
दूर मी करेल  का
सुखाचा या नदीत
मी वाहत  जायेल  का


दुःख आहे किती  माझा  मनात
आज कुणा  कळेल का


दुःखाला या मी माझ्या लपवून
आज तरी ठेवेल  का
माझ्या  या दुःखाच्या  शहरात
सुखाची वर्षा  होईल का


दुःख आहे किती  माझा  मनात
आज कुणा  कळेल का


                                  कवी
                             बबलु पिस्के
                          9623567737

Marathi Kavita : मराठी कविता

दुःख
« on: March 09, 2015, 02:34:18 PM »

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