Author Topic: **** आशय कवितेचा ****  (Read 649 times)

Offline विजय वाठोरे सरसमकर

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  • विजय वाठोरे सरसमकर
**** आशय कवितेचा ****
« on: July 29, 2015, 09:11:12 AM »
****  आशय कवितेचा ****

हुंदाक्यासवे आवरतो मी या भावनांना
तरीही मन बिथरते पाहून आशय कवितेचा

नाविन्याचा ध्यास मी घेई
सृजनशीलता कवितेचा आशय देई
मन माझे मला नक्षत्रांपलीकडे नेई
या कवितेच्या ओळी मला चंद्र ,चांदणे देई

सूर मनात रुजता कवितेचा आशय तो सुचवी
मन थिरकत गायी कृष्ण बासरीची गोडवी
विश्व नादावले सारे ऐकुनी तुकारामांच्या ओवी
आठवण येता शिवरायांची शब्द शब्द कविता जुळवी !

काहुरल्या सांज वेळी गाणे गावेसे वाटते
काळोख्या आभाळात चंद्र जसा शोभते
मन माझे भिरभिर कवितेच्या ओघात वाहते
नवनवीन शब्दांच्या कल्पनेत माझी कविता हि जन्मते .

                                    विजय वाठोरे सरसमकर
                                       9975593359 

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