Author Topic: समंदर कि लहरोंसे..  (Read 2236 times)

Offline virat shinde

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समंदर कि लहरोंसे..
« on: September 23, 2014, 11:12:44 PM »
समंदरकी लहरोंसे कभी
दोस्ती नही होती,
ईनसानीयत कभी
जात धर्म नाही देखती,
जिंदगी एक दर्या है
जिसमे हम कुद चुके है,
हर हाल में तैरणा है
हैराणी की कोई बात नही होती,
मुस्कीले आती रहेंगी
ठोकरे मिलती रहेंगी,
ये जिंदगी है दोस्तो
हर हाल मे जिकर रहेंगी,
गैराही ना नापते बैठो
कछवा तुम्हे हरायेगा,
जित के रास्तोंपे चलतेही
आंधेरा सामने आयेगा,
रोशणी की और दौडते दौडते
आंधेरेको भुल जायेगा,
जिना ईसीका नाम है
जिंदगी का मजा आयेगा,
इंसानीयत से जिना सिखो
तो ऐ समंरभी कुछ न कर पायेगा..


Marathi Kavita : मराठी कविता

समंदर कि लहरोंसे..
« on: September 23, 2014, 11:12:44 PM »

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