Author Topic: ना बन तु कसाई  (Read 625 times)

Offline sanjay bansode

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ना बन तु कसाई
« on: May 27, 2015, 07:14:41 PM »
ना हिंदू बन ना मुस्लिम बन
ना बन तू  ईसाई !
जात धर्म को बाँटनेवाला
ना बन तू कसाई !!

देख तमाशा तु गरीब का
इंसानियत रो रही है
जो सच्ची थी कबीरकी वाणी
धूलमिट्टी मे खो गई है !
देखकर पापी इस दुनियाँ के
तू तो जागले भाई !
जात धर्म को बाँटनेवाला
ना बन तू कसाई !!

धर्म धर्म के नामपर कितना
अधर्म हो रहा है
बह रही है खून की नदियाँ
भगवानभी सो रहा है !
मंदिरों के पत्थरों को कभी
ना दिखती है सच्चाई !
जात धर्म को बाँटनेवाला
ना बन तू कसाई !!

प्यार आता है सिर्फ अपनोंपर
पराया हो गया दुश्मन
जो खिलाये रोटी मै उसका
कहता है भूखा मन !
क्या देखता है अपना पराया
सभीको मानले भाई !
जात धर्म को बाँटनेवाला
ना बन तू कसाई !!

बड़ा हुआ है अब तू भी
सीखले सच्चाई से जुड़ना
बंद कर अब तू पत्थरों पे
अंधे भगवान को ढूँढ़ना !
अंधविश्वास को छोड़दे अब तू
कहता है संजय भाई !
जात धर्म को बाँटनेवाला
ना बन तू कसाई !!


कवी - संजय बनसोडे
9819444028

Marathi Kavita : मराठी कविता

ना बन तु कसाई
« on: May 27, 2015, 07:14:41 PM »

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