Author Topic: दुकान  (Read 1492 times)

Offline Mrs. Sanjivani S. Bhatkar

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दुकान
« on: August 12, 2013, 03:37:49 PM »
दुकान 

 

 

दुकान  तुजे  छान छान   

त्याहून  तू  अधिक  छान   

पण  समान  देताना  तू

ठेवते  सगळ्यांवर  ध्यान 

            मालाची  किंमत  आहे  जास्त 

            त्यावर  सरकारने  लावला  कर  मस्त 

            ठेवला  त्यावर  बंदोबस्त       

            त्याहून गीराहेक झाले   त्रस्त 

माल  आहे  स्वस्त 

त्यासाठी  केले  होते  कष्ट 

पण  गीराहेकाने  समान  केले  नष्ट 

गीराहेक  झाले  धस्त 

            दुकानावर  आहे  वाणी

            तो  झाला  मालाचा  धनी

 

 

 

सौ  . संजीवनी  संजय  भाटकर

 

Marathi Kavita : मराठी कविता