Author Topic: दोस्त तू  (Read 733 times)

Offline शिवाजी सांगळे

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  • या जन्मावर, या जगण्यावर, शतदा प्रेम करावे.....
दोस्त तू
« on: December 06, 2014, 12:29:35 AM »
दोस्त तू

गुम है हर कोई
अपने ही आप में;
थांमे बैठा हर शक्स
मोबाईल अपने हाथों मे।

नहीं खबर यहां किसे
हरएक है परेशानी मे;
क्युं छुपाता है राहगीर
जाना है कौन गलीमें।

देर है शाम ढलने 
सुरज भी आसमां मे;
यूं ना जा अभी
दोस्त तू मयखाने मे।


© शिवाजी सांगळे

Marathi Kavita : मराठी कविता

दोस्त तू
« on: December 06, 2014, 12:29:35 AM »

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