Author Topic: धर्म या अधर्म  (Read 475 times)

Offline sanjay limbaji bansode

  • Jr. Member
  • **
  • Posts: 257
धर्म या अधर्म
« on: May 27, 2015, 07:07:12 PM »
जाती जाती मे धर्मों धर्मों मे
बट गये सारे इंसान
बच्चो को भी सिकाया इसने
जो था इससे अंजान !

पैदा होते ही उसपर
धर्म का टीका लगाया
अपना धर्म है सबसे प्यारा
उस नादान को सिकाया !

पढ़ने लगा जब वो बच्चा
तब धर्म पुराण बताया
धर्मके तत्वों परही चलना ?
उस मासूम को सताया !

बच्चा जब बड़ा हुआ
धर्म के जाल मे फँसा हुआ
दूसरे धर्मपर चिड़ा हुआ
जिहादके नामपर खड़ा हुआ !

पिया था अब उसने भी
धर्मविष का प्याला
छीन लिया था धर्मने उसका
इंसानियत का निवाला !

धर्म के दुश्मनों को सबक सिकाकर
हो गया धर्म रखवाला
हरा लाल नीला सफेद
किया रंगो का बँटवारा !

कटने लगा अब थोडा थोडा
हिंदुस्तान हमारा
पैदा हुआ था एक अलग ही धर्म
जो था भगवान से भी न्यारा !


संजय बनसोडे
9819444028

Marathi Kavita : मराठी कविता

धर्म या अधर्म
« on: May 27, 2015, 07:07:12 PM »

Download Free Marathi Kavita Android app

Join Marathi Kavita on Facebook

 

With Quick-Reply you can write a post when viewing a topic without loading a new page. You can still use bulletin board code and smileys as you would in a normal post.

Name: Email:
Verification:
एक गुणिले दहा किती ? (answer in English number):