Author Topic: ज़िंदगी का मोड़  (Read 645 times)

Offline dattarajp

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ज़िंदगी का मोड़
« on: June 08, 2015, 01:17:43 PM »
      जिंदगी का मोड़

पता नहीँ जिंदगीने कैसा
खेल खेला है।
हमें ये कौनसी मोड़ पे
लाके खड़ा कर दिया है।

कहते है दुनियाँवाले 
हामें कुछ काम नहीँ ।
पर हामें पता है ।
हामारे जिंदगी में आराम नहीँ ।

पर हाम भी कुछ कहना
चाहते है ।
हाम भी कुछ करना चाहते है ।
जिंदगी के मायाजाल  में
हाम भी आज फसना चाहते  है ।

जिंदगी का ये नायाब खेल
आज हाम भी खेलना चाहते है ।
जिंदगी का नायाब मोड़
आज हाम मोड़ना चाहते है ।

एक पल तो हाम आपने लिये
जीना चाहते है।
वक्त को भी हाम थोडासा
आज रोकना चाहते है।

         कवी -बबलु
      9623567737

Marathi Kavita : मराठी कविता

ज़िंदगी का मोड़
« on: June 08, 2015, 01:17:43 PM »

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