आईची माया

Started by Mrs. Sanjivani S. Bhatkar, August 12, 2013, 03:39:57 PM

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Mrs. Sanjivani S. Bhatkar

आईची  माया 


नौ  मास  उदरी
वेदना  प्रसुतीचा 
तीच  सोसते
आई  शेवटी  आईच  असते 
तिची  माया तिची  छाया
वेगळीच  असते     
नुसत्या  रडण्याचाही  आई 
तुला  इशारा  समजायचा 
माझ्या  बोबड्या  बोलण्याचाही 
तुला  अर्थ  लागायचा 
काऊ  – चिऊ  चा  घास  भरवताना   
तू  काय  काय  नाही  करायचीस
माझ्या  बरोबर  धावयाचीस
माझ्या   सारख  रुसायचीस 
देऊन  संस्कार  तीच  घडवते
कधी  होऊन  कठोर  तीच  रडवते 
तीच  कुशीत  घेऊन 
मायाही  देते 
आजारी  मी  असताना 
डोळे  तुजे  जागायचे
माझ्या  आयुष्यासाठी 
आई  नवस  किती  करायच
कठीण  समयी  बसून  समीप 
रात्र  रात्र  तीच  जागते
आशी  प्रेमळ  केवळ 
आई  आणि  आईच  असते 
तुझ्यातल्या  भक्तीचा  अर्थ   आता  कळला 
त्या  समाधानाचा  अर्थ  आता कळला 
आता  कळले  मला  आई   
"आई  पणाचे   मोल  "




- सौ . संजीवनी  संजय  भाटकर