पंचक कारिदीन-१७ जुलाई २०२५ - गुरुवार-1-⭐🌙✨🔢🌌⚖️📅⚠️🔥💔💰🪵🏠🔨🗺️🚗💍❌🙏🧘‍♀️

Started by Atul Kaviraje, July 18, 2025, 05:22:13 PM

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Atul Kaviraje

पंचक कारिदीन-

पंचक का दिन: महत्व, उदाहरण और भक्तिभाव (१७ जुलाई २०२५ - गुरुवार)

आज १७ जुलाई २०२५, गुरुवार का दिन है और यह दिन "पंचक" के अंतर्गत आता है। भारतीय ज्योतिष और हिन्दू धर्म में पंचक को एक विशेष अवधि माना जाता है, जिसमें कुछ शुभ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। यह अवधि पाँच नक्षत्रों के समूह से बनती है, जिनका संबंध मृत्यु और उसके बाद की क्रियाओं से माना जाता है। हालाँकि, पंचक केवल अशुभता का प्रतीक नहीं है; यह आत्म-चिंतन, सावधानी और आध्यात्मिक उन्नति का भी अवसर प्रदान करता है।

आइए, इस पंचक काल के महत्व को विस्तार से समझते हैं:

१. पंचक क्या है?
पंचक ज्योतिषीय गणना के अनुसार चंद्रमा का धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती इन पाँच नक्षत्रों में गोचर करना पंचक कहलाता है। इन पाँच नक्षत्रों का समूह पांच दिनों तक रहता है, इसीलिए इसे 'पंचक' कहा जाता है। इन नक्षत्रों में चंद्रमा के रहने के दौरान कुछ विशिष्ट कार्यों को वर्जित माना जाता है।
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२. पंचक का ज्योतिषीय आधार
पंचक का आधार मुख्यतः चंद्र गोचर और नक्षत्रों की स्थिति पर निर्भर करता है। ये पाँच नक्षत्र जल तत्व प्रधान होते हैं और इनका संबंध मृत्यु के साथ होने वाले प्रभावों से जोड़ा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इन नक्षत्रों में किए गए कार्य का पाँच गुना फल प्राप्त होता है, चाहे वह शुभ हो या अशुभ। इसलिए अशुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।
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३. पंचक के प्रकार और उनके प्रभाव
पंचक मुख्य रूप से पाँच प्रकार के होते हैं, जो वार (दिन) के आधार पर निर्धारित होते हैं:

रोग पंचक: रविवार को शुरू होने वाला पंचक। यह शारीरिक कष्ट या मानसिक तनाव दे सकता है।

राज पंचक: सोमवार को शुरू होने वाला पंचक। यह सरकारी कार्यों में सफलता और राजसी सुख दे सकता है (यह अपवाद है)।

अग्नि पंचक: मंगलवार को शुरू होने वाला पंचक। यह आग या वाद-विवाद से संबंधित कार्यों में सावधानी बरतने का संकेत देता है।

मृत्यु पंचक: शनिवार को शुरू होने वाला पंचक। इसे सबसे अशुभ माना जाता है और इसमें मृत्यु के समान कष्ट हो सकता है।

चोर पंचक: शुक्रवार को शुरू होने वाला पंचक। यह यात्रा, व्यापार या लेनदेन में सावधानी बरतने की सलाह देता है।

आज गुरुवार है, इसलिए यह पंचक "राज पंचक" के समान नहीं है, बल्कि एक सामान्य पंचक है जिसमें सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
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४. पंचक में वर्जित कार्य
कुछ कार्य जिन्हें पंचक के दौरान करने से बचना चाहिए:

लकड़ी या लकड़ी से बने सामान खरीदना/इकट्ठा करना: यह अग्नि के जोखिम या धन हानि से जुड़ा है। 🪵🚫

छत डालना या घर का निर्माण शुरू करना: इससे घर में अशांति या संकट आ सकता है। 🏠🔨🚫

यात्रा करना (विशेषकर दक्षिण दिशा में): यह यात्रा में बाधा या दुर्घटना का कारण बन सकता है। 🗺�🚗🚫

अर्थी बनाना या शवदाह करना: यदि पंचक में किसी की मृत्यु हो जाए, तो पाँच पुतले बनाकर दाह संस्कार करने की परंपरा है ताकि परिवार में अन्य मृत्यु न हो। 🕊�⚰️

विवाह जैसे बड़े शुभ कार्य: हालाँकि, ज्योतिषियों की सलाह के अनुसार कुछ पंचकों में यह किया जा सकता है। 💍❌

५. पंचक में क्या करें? (लाभकारी कार्य)
पंचक के दौरान कुछ कार्य अत्यंत शुभ माने जाते हैं:

पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान: इस दौरान किए गए जाप, दान, हवन से दोगुना फल मिलता है। 🙏✨

आत्म-चिंतन और ध्यान: यह समय आंतरिक शांति और आध्यात्मिक विकास के लिए उत्तम है। 🧘�♀️💭

पौधे लगाना: पंचक में पेड़-पौधे लगाना शुभ माना जाता है। 🌳🌱

गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करना: दान-पुण्य से शुभ फल प्राप्त होता है। 🤝💖

नियमित कार्य जारी रखना: दैनंदिन कार्यों पर पंचक का कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। ✅

--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-17.07.2025-गुरुवार.
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