अश्वत्थ मारुति पूजन - 26 जुलाई 2025, शनिवार-1-🙏🌿🐒

Started by Atul Kaviraje, July 27, 2025, 10:25:31 AM

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Atul Kaviraje

अश्वत्थ मारुति पूजन-

अश्वत्थ मारुति पूजन - 26 जुलाई 2025, शनिवार

आज 26 जुलाई 2025, शनिवार का दिन अश्वत्थ मारुति पूजन के लिए अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण है। यह दिन भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना और विशेष रूप से पीपल वृक्ष के नीचे उनकी उपासना के लिए समर्पित है। शनिवार का दिन स्वयं हनुमान जी और शनिदेव को समर्पित है, इसलिए इस दिन अश्वत्थ मारुति पूजन का विशेष महत्व होता है। यह पूजन जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति प्रदान करने वाला माना जाता है। 🙏🌿🐒

1. अश्वत्थ मारुति पूजन का महत्व
अश्वत्थ, यानी पीपल का वृक्ष 🌳, हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसे 'देव वृक्ष' की उपाधि प्राप्त है और इसमें त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का वास माना जाता है। हनुमान जी को वायु पुत्र और रुद्रावतार माना जाता है। जब हनुमान जी की पूजा पीपल वृक्ष के नीचे की जाती है, तो इसे 'अश्वत्थ मारुति पूजन' कहते हैं। मान्यता है कि पीपल की जड़ों में ब्रह्मा, तने में विष्णु और अग्रभाग में शिव का वास होता है। इसके साथ ही, पीपल पर पितरों और विभिन्न देवताओं का भी वास होता है। इस दिन हनुमान जी की पीपल के नीचे पूजा करने से शनि दोषों से मुक्ति मिलती है और हनुमान जी की असीम कृपा प्राप्त होती है। यह पूजन विशेष रूप से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से पीड़ित व्यक्तियों के लिए लाभकारी है।

2. शनिवार और हनुमान जी का संबंध
शनिवार का दिन भगवान शनिदेव को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, हनुमान जी ने शनिदेव को रावण की कैद से मुक्त कराया था। तब शनिदेव ने हनुमान जी को वचन दिया था कि जो कोई भी शनिवार को उनकी पूजा करेगा, उसे शनि के प्रकोप से मुक्ति मिलेगी। इसलिए शनिवार को हनुमान जी की पूजा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को उनके बुरे प्रभावों से बचाते हैं। 🌟 हनुमान जी स्वयं संकटमोचन हैं, और शनिवार को उनकी उपासना से सभी संकट दूर होते हैं।

3. पूजन विधि और सामग्री
अश्वत्थ मारुति पूजन के लिए प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पीपल वृक्ष के पास जाकर सबसे पहले उसे प्रणाम करें।
सामग्री: हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र (यदि पीपल के नीचे मंदिर न हो), लाल वस्त्र, चमेली का तेल, सिंदूर, लाल फूल (गुलाब या गुड़हल), तुलसी के पत्ते, बेसन के लड्डू या बूंदी के लड्डू, गुड़-चना, गंगाजल, जल, धूप, दीप, अगरबत्ती।
विधि:

पीपल वृक्ष की जड़ में थोड़ा जल अर्पित करें।

इसके बाद हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

उन्हें लाल वस्त्र अर्पित करें।

चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर हनुमान जी को लेप लगाएं (सिंदूर दान)।

लाल फूल और तुलसी के पत्ते अर्पित करें।

बेसन के लड्डू या बूंदी के लड्डू, गुड़-चना का भोग लगाएं।

धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएं।

हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करें।

आरती करें।

पीपल वृक्ष की सात या ग्यारह परिक्रमा करें और प्रत्येक परिक्रमा पर 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' या 'ॐ हं हनुमते नमः' का जाप करें।

अंत में भगवान से अपनी मनोकामनाएं कहें और क्षमा याचना करें। 🙏🌿 Hanuman Chalisa 📖

4. पूजन के लाभ और फल
अश्वत्थ मारुति पूजन के अनेक लाभ हैं:

शनि दोष से मुक्ति: यह शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा के नकारात्मक प्रभावों को कम करता है।

शत्रु बाधा से मुक्ति: शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।

रोग मुक्ति: स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। ⚕️

धन-धान्य में वृद्धि: आर्थिक समृद्धि और व्यापार में सफलता मिलती है। 💰

सुख-शांति की प्राप्ति: घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का वास होता है। 🏡

भय और संकटों से मुक्ति: हनुमान जी स्वयं संकटमोचन हैं, इसलिए वे सभी प्रकार के भय और बाधाओं को दूर करते हैं।

मनोकामना पूर्ति: सच्चे मन से की गई प्रार्थनाएं हनुमान जी पूर्ण करते हैं।

5. उदाहरण सहित भक्तिभाव
इस पूजन का महत्व कई भक्तों के जीवन में देखा गया है। उदाहरण के लिए, कई लोग जो शनि की साढ़ेसाती के कारण गंभीर आर्थिक संकट या स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे थे, उन्होंने शनिवार को अश्वत्थ मारुति पूजन करके चमत्कारिक रूप से राहत पाई है। कुछ भक्तों ने अपनी खोई हुई संपत्ति वापस पाई है, तो कुछ ने असाध्य रोगों से मुक्ति पाई है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। जब भक्त पूर्ण समर्पण के साथ इस पूजन को करते हैं, तो हनुमान जी उनकी पुकार अवश्य सुनते हैं। 💖

--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-26.07.2025-शनिवार.
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