भ्रष्टाचार की काली छाया-

Started by Atul Kaviraje, August 01, 2025, 10:36:04 PM

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Atul Kaviraje

दीर्घ हिंदी कविता-

भ्रष्टाचार की काली छाया-

आज का सच है, यह कैसी माया, 📅
भ्रष्टाचार की काली छाया।
भारत के जन-जन को सताए,
विकास की राह पर, रोड़े लगाए।
अर्थ: आज की सच्चाई यह कैसी माया है, भ्रष्टाचार की काली छाया। यह भारत के हर व्यक्ति को परेशान करती है, विकास के मार्ग में बाधा डालती है।

1. विकास की राह में बाधा
पैसा बने यहाँ, हर काम का आधार, 💸
विकास के वादे, होते बेकार।
सड़कें टूटीं, पुल हुए बेहाल,
भ्रष्टाचार से, देश का बुरा हाल।
अर्थ: यहाँ हर काम पैसे के आधार पर होता है, विकास के वादे बेकार हो जाते हैं। सड़कें टूटी हैं, पुल बदहाल हैं, भ्रष्टाचार से देश का बुरा हाल है।

2. गरीबी की खाई
गरीबों की थाली, रहती है खाली, 🧑�🤝�🧑
अमीरों की तिजोरी, भरती जाती है।
योजनाओं का पैसा, बिचौलिये खाएं,
जनता की बदहाली, बढ़ती ही जाए।
अर्थ: गरीबों की थाली खाली रहती है, जबकि अमीरों की तिजोरी भरती जाती है। योजनाओं का पैसा बिचौलिए खा जाते हैं, और जनता की बदहाली बढ़ती ही जाती है।

3. शिक्षा-स्वास्थ्य पर वार
स्कूलों में शिक्षक, न मिलते हैं सही, 🏫
अस्पतालों में दवा, होती नहीं। 🏥
जनता भटके, मारे-मारे फिरें,
भ्रष्टाचार से, हर सुविधा गिरे।
अर्थ: स्कूलों में सही शिक्षक नहीं मिलते, अस्पतालों में दवा नहीं होती। जनता भटकती रहती है, भ्रष्टाचार से हर सुविधा गिरती है।

4. न्याय की डोर टूटी
न्याय के मंदिर, बिकते हैं कभी, ⚖️
दोषी छूटे, निर्दोष फंसे।
पुलिस-प्रशासन, सब लिप्त हैं आज,
जनता का विश्वास, टूटे हर समाज।
अर्थ: न्याय के मंदिर कभी-कभी बिक जाते हैं, दोषी छूट जाते हैं और निर्दोष फंस जाते हैं। पुलिस-प्रशासन सब आज लिप्त हैं, जनता का विश्वास हर समाज में टूट रहा है।

5. लोकतंत्र पर आघात
वोटों की मंडी, नेताजी का खेल, 🗳�
कुर्सी के लिए, करते हर मेल।
जनता की आवाज़, रहती अनसुनी,
लोकतंत्र की आत्मा, जाती है धुनी।
अर्थ: वोटों का बाज़ार, नेताओं का खेल, कुर्सी के लिए हर तरह का मेलजोल करते हैं। जनता की आवाज अनसुनी रह जाती है, लोकतंत्र की आत्मा कमजोर होती जा रही है।

6. नैतिकता का पतन
ईमानदारी का, अब नहीं कोई मोल, 😔
बेईमानी का, खुल गया है पोल।
समाज में फैला, यह कैसा जहर,
नैतिकता का, टूट गया है कहर।
अर्थ: ईमानदारी का अब कोई मोल नहीं, बेईमानी का पर्दाफाश हो गया है। समाज में यह कैसा जहर फैल गया है, नैतिकता का कहर टूट गया है।

7. आओ करें प्रतिकार
चलो मिलकर, अब आवाज़ उठाएं, 🗣�
भ्रष्टाचार को, जड़ से मिटाएं।
सत्य और निष्ठा से, जीवन जिएं,
भारत को फिर से, महान बनाएं। 🙏🇮🇳
अर्थ: आओ मिलकर अब आवाज उठाएं, भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाएं। सत्य और निष्ठा से जीवन जिएं, भारत को फिर से महान बनाएं।

दीर्घ कविता का इमोजी सारांश:
भ्रष्टाचार की छाया 📉🚫। विकास में बाधा 💸🚧। गरीबी 🧑�🤝�🧑, सेवाओं में गिरावट 🏥🏫। न्याय का पतन ⚖️🚨। लोकतंत्र पर आघात 🗳�👎। नैतिकता का क्षरण 😔💔। आओ करें प्रतिकार 🗣�🤝।

--अतुल परब
--दिनांक-01.08.2025-शुक्रवार.
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