पंचमी श्राद्ध: भक्ति और श्रद्धांजलि का पर्व-

Started by Atul Kaviraje, September 12, 2025, 03:03:48 PM

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Atul Kaviraje

पंचमी श्राद्ध-

पंचमी श्राद्ध: भक्ति और श्रद्धांजलि का पर्व-

पंचमी श्राद्ध: एक कविता-

पंचमी का दिन, श्राद्ध का पावन पर्व आया है,
पूर्वजों की आत्मा को यादों में समाया है।
हाथ जोड़कर करते हैं हम उनको प्रणाम,
उनका आशीर्वाद मिले, बस यही हमारा काम।

अर्थ: यह कविता बताती है कि पंचमी का दिन हमारे पूर्वजों को याद करने का है, जब हम उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं और उनका आशीर्वाद मांगते हैं।

काले तिल और गंगाजल का करते हैं तर्पण,
आत्मा को मिले शांति, यही है हमारा अर्पण।
पिंडदान का यह कर्म, है भक्ति का भाव,
यह दिखाता है हमारे हृदय का गहरा लगाव।

अर्थ: इस पद में तर्पण और पिंड दान की प्रक्रिया का वर्णन है, जो पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए किए जाते हैं।

कुंवारी कन्याओं को खिलाते हैं हम भोजन,
उनके आशीर्वाद से मिलता है सुख का जीवन।
यह है हमारी संस्कृति का एक सुंदर सार,
जो जोड़ता है हमें परंपरा से हर बार।

अर्थ: यह पद कुंवारी कन्याओं को भोजन कराने के महत्व को बताता है, जिससे हमें सुख और समृद्धि मिलती है।

घर-घर में गूंजती है भक्ति की ध्वनि,
पूर्वजों को याद करने की यह है सच्ची तपोभूमि।
यह हमें सिखाता है कृतज्ञता का पाठ,
यह है हमारे जीवन का एक सुंदर घाट।

अर्थ: यह पद बताता है कि श्राद्ध का समय भक्ति का है, और यह हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना सिखाता है।

दीपक जलाकर करते हैं हम उनका सम्मान,
उनकी यादों में है हमारा सच्चा अभिमान।
वे भले ही हमारे साथ ना हों शरीर से,
पर उनका आशीर्वाद हमेशा रहता है हमारे पास।

अर्थ: इस पद में पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का वर्णन है, भले ही वे हमारे साथ शारीरिक रूप से न हों, लेकिन उनका आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ होता है।

--अतुल परब
--दिनांक-11.09.2025-गुरुवार.
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