श्री भैरवनाथ यात्रा प्रIरंभ-किकली, तालुका-वाई-'किकली का भैरव'-

Started by Atul Kaviraje, October 14, 2025, 12:19:03 PM

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Atul Kaviraje

श्री भैरवनाथ यात्रा प्रIरंभ-किकली, तालुका-वाई-

सुंदर हिंदी कविता: 'किकली का भैरव'-

चरण (Stanza)   कविता (Poem)   प्रत्येक चरण का हिंदी अर्थ (Short Meaning)

१   किकली गाँव में, आज उत्सव छाया है! भैरवनाथ की यात्रा, का आरंभ आया है! वाई तालुका सारा, भक्ति में झूमा है! हर भक्त के माथे, श्रद्धा का चूमा है!   अर्थ: किकली गाँव में आज उत्सव का माहौल है। भैरवनाथ की यात्रा शुरू हो गई है। वाई तालुका भक्ति में झूम रहा है। हर भक्त के माथे पर श्रद्धा का तिलक है।

२   हेमाडपंथी मंदिर, सदियों का है पुराना! शिल्प कला का देखो, अद्भुत है नज़राना! रामायण के चित्र, खंभों पर हैं उकेरे! लगता है जैसे प्रभु, यहाँ स्वयं ही ठहरे!   अर्थ: हेमाडपंथी शैली का यह मंदिर सदियों पुराना है। इसकी शिल्पकला एक अद्भुत उपहार है। खंभों पर रामायण के चित्र उकेरे गए हैं। ऐसा लगता है जैसे स्वयं भगवान यहाँ विराजमान हैं।

३   शिवजी का ये रूप, है बड़ा ही बलवान! भैरव है ग्रामदैवत, सबका करता है कल्याण! पालखी निकलती है, ढोल-ताशे की धुन में! मन की हर मुराद, बसती है हर जन में!   अर्थ: भगवान शिव का यह उग्र रूप बहुत शक्तिशाली है। भैरव ग्रामदैवत हैं और सबका भला करते हैं। ढोल-ताशे की धुन पर पालखी निकाली जाती है। हर व्यक्ति के मन में मनोकामनाएँ भरी हैं।

४   यहाँ वीर जवानों का, भी होता है सम्मान! कुश्ती का मैदान है, जहाँ बढ़ता है ये मान! 'केसरी' की स्पर्धा, यहाँ शौर्य दिखलाती है! भैरव की ये शक्ति, सबको ऊर्जा दिलाती है!   अर्थ: यहाँ बहादुर जवानों का भी सम्मान होता है। कुश्ती के मैदान पर उनका सम्मान बढ़ता है। 'केसरी' (कुश्ती) की प्रतियोगिता शौर्य दिखाती है। भैरव की यह शक्ति सबको ऊर्जा देती है।

५   चंदनगढ़-वंदनगढ़, पास ही हैं पहाड़! मंदिर का ये संकुल, भरता है हुंकार! जागृत है शिवलिंग, नंदी की गर्दन झुकी! भक्तों की हर बाधा, यहाँ आकर रुकी!   अर्थ: चंदनगढ़ और वंदनगढ़ के पहाड़ पास में हैं। मंदिर का यह संकुल शक्ति से भरा है। यहाँ का शिवलिंग जागृत है और नंदी की गर्दन झुकी हुई है। भक्तों की हर समस्या यहाँ आकर दूर हो जाती है।

६   नारियल और फूल, भक्त अर्पण करते हैं! अपने जीवन का, भैरव को समर्पण करते हैं! जीवन की रक्षा हो, यही प्रार्थना है सब की! कृपा बनी रहे, इस देवता की अब की!   अर्थ: भक्त भगवान को नारियल और फूल अर्पित करते हैं। वे अपने जीवन को भैरव को समर्पित करते हैं। सबकी प्रार्थना है कि हमारे जीवन की रक्षा हो। इस देवता की कृपा हम पर हमेशा बनी रहे।

७   शक्ति का यह केंद्र है, किकली की यह शान! भैरव के चरणों में, है हम सबका स्थान! दर्शन करके उनका, हर दुःख है मिट जाता! 'जय भैरवनाथ' बोलकर, मन शांत हो जाता!   अर्थ: यह शक्ति का केंद्र है और किकली का गौरव है। भैरव के चरणों में हम सबका स्थान है। उनके दर्शन करने से हर दुःख मिट जाता है। 'जय भैरवनाथ' बोलने से मन को शांति मिलती है।

--अतुल परब
--दिनांक-12.10.2025-रविवार.
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