भीमदास कारंडे महापुण्यतिथी-पंढरपूर- 'भीमदास कीर्तन'-

Started by Atul Kaviraje, October 14, 2025, 12:20:29 PM

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Atul Kaviraje

भीमदास कारंडे महापुण्यतिथी-पंढरपूर-

सुंदर हिंदी कविता: 'भीमदास कीर्तन'

चरण (Stanza)   कविता (Poem)   प्रत्येक चरण का हिंदी अर्थ (Short Meaning)

१   पंढरपूर में आज, पावन घड़ी है आई! भीमदास संत की, पुण्यतिथी है छाई! १२ अक्टूबर को, भक्ति का है रविवार! विठ्ठल के चरणों में, है प्रेम का विस्तार!   अर्थ: पंढरपूर में आज एक पवित्र क्षण आया है। संत भीमदास महाराज की पुण्यतिथी का उत्सव छाया हुआ है। १२ अक्टूबर को, भक्ति का रविवार है। विठ्ठल के चरणों में प्रेम का विस्तार है।

२   सरल भक्ति का मार्ग, हमें उन्होंने दिखाया! नामस्मरण के जप से, मोक्ष पाना सिखाया! जाति-भेद को त्यागो, समरसता का ज्ञान! हर प्राणी में देखो, प्रभु का ही सम्मान!   अर्थ: उन्होंने हमें सरल भक्ति का रास्ता दिखाया। नामस्मरण (नाम जपने) से मोक्ष पाने की शिक्षा दी। जाति-भेद को त्यागकर, समानता का ज्ञान दिया। हर प्राणी में भगवान का सम्मान देखने को कहा।

३   ज्ञानोबा-तुकाबा की, वाणी को आगे बढ़ाया! कीर्तन के स्वर में, अमृत रस बरसाया! हर अभंग है उनका, जीवन का है सार! बाँटा उन्होंने प्रेम, सबको ही निस्सार!   अर्थ: उन्होंने संत ज्ञानेश्वर और तुकाराम की शिक्षाओं को आगे बढ़ाया। उनके कीर्तन के स्वरों में भक्ति का अमृत बरसा। उनका हर अभंग जीवन का सार है। उन्होंने सभी को निःस्वार्थ प्रेम बाँटा।

४   छोटी-छोटी दिंडियाँ, समाधि तक आती हैं! पादुकाओं की पूजा, मन में भक्ति लाती हैं! वारकरी की टोली, भजन गाती जाती है! अलंदी-देहू की, यादें सब पाती हैं!   अर्थ: छोटी-छोटी दिंडियाँ उनकी समाधि तक आती हैं। पादुकाओं की पूजा से मन में भक्ति का संचार होता है। वारकरियों का समूह भजन गाते हुए चलता है। उन्हें अलंदी और देहू के संतों की याद आती है।

५   महाप्रसाद का भोग, सबको ही मिलता है! पेट भरता है सब का, मन भी तो खिलता है! अन्नदान की सेवा, है उनकी ही सीख! भूखे को भोजन दो, चाहे हो गरीब-भीख!   अर्थ: महाप्रसाद (भोजन) का भोग सबको मिलता है। इससे सबका पेट भरता है और मन भी खुश होता है। अन्नदान की सेवा उनकी ही शिक्षा है। उन्होंने कहा कि भूखे को भोजन दो, चाहे वह अमीर हो या गरीब।

६   प्रवचन की वाणी, देती सबको आराम! जीवन को जीने का, देती है शुभ काम! नश्वर है ये काया, अमर है विठ्ठल राम! भक्ति करो जीवन भर, ले लो प्रभु का नाम!   अर्थ: प्रवचन की बातें सबको शांति देती हैं। ये हमें जीवन जीने का सही तरीका बताती हैं। यह शरीर नश्वर है, लेकिन विठ्ठल और राम अमर हैं। जीवन भर भक्ति करो और भगवान का नाम लो।

७   दिव्य ज्योति का देखो, पंढरपूर में वास! संतों की समाधि का, है यह पावन प्रवास! भीमदास कारंडे की, कृपा मिले सबको आज! 'जय राम कृष्ण हरी', हो सफल हर काज!   अर्थ: पंढरपूर में दिव्य ज्योति का निवास है। संतों की समाधि पर यह पवित्र यात्रा है। भीमदास कारंडे महाराज की कृपा आज सबको मिले। 'जय राम कृष्ण हरी' कहने से हर काम सफल होता है।

--अतुल परब
--दिनांक-12.10.2025-रविवार.
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