कृष्ण का विग्रह और मानवता के लिए पूजा का आदर्श-'विग्रह में विराट'-

Started by Atul Kaviraje, October 15, 2025, 11:15:15 AM

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Atul Kaviraje

कृष्ण का विग्रह और मानवता के लिए पूजा का आदर्श-
(Krishna's Deity and the Ideal of Worship for Humanity)
Krishna's ideal of worship of God and humanity-

कृष्ण का विग्रह और मानवता के लिए पूजा का आदर्श-

विषय: कृष्ण का विग्रह और मानवता के लिए पूजा का आदर्श (Krishna's Deity and the Ideal of Worship for Humanity)

हिन्दी कविता: 'विग्रह में विराट'-

चरण (Stanza)   कविता (Poem - 04 Lines Each)   हिन्दी अर्थ (Meaning)   चित्र, प्रतीक और इमोजी

01   रूप और आदर्श   रूप और आदर्श   👑💙
विग्रह तेरा, बस एक रूप नहीं,   हे कृष्ण! तुम्हारा विग्रह (मूर्ति) केवल एक आकृति नहीं है,   
मानवता का तू है सूप्रतिरूप कहीं।   तुम मानवता के लिए एक श्रेष्ठ आदर्श हो।   
मन को जोड़े, वह अनूप सही,   यह अनोखी छवि मन को ईश्वर से जोड़ती है,   
पूजा का आदर्श, होवे दुरूप नहीं।   और पूजा का यह आदर्श कभी भी बुरा नहीं हो सकता।   

02   भक्ति और भाव   भक्ति और भाव   💖🙏
बालपन में तू है गोपाल प्यारा,   बचपन में तुम प्यारे गोपाल के रूप में हो,   
भक्ति का तू है निर्मल किनारा।   तुम भक्ति का सबसे स्वच्छ आश्रय हो।   
सामग्री से नहीं, भाव स्वीकारा,   तुमने पूजा की सामग्रियों से नहीं, बल्कि सच्चे भाव को स्वीकार किया,   
प्रेम बिना जग, सब है हारा।   प्रेम के बिना यह संसार सब कुछ हार गया है।   

03   कर्मयोग का संदेश   कर्मयोग का संदेश   🎯💪
हाथ में मुरली, पर गीता ज्ञान,   तुम्हारे हाथ में बांसुरी है, पर तुमने 'गीता' का ज्ञान दिया,   
कर्म ही पूजा, यही है विधान।   कर्म ही वास्तविक पूजा है, यही नियम है।   
फल की चिंता, करो न ध्यान,   कर्मों के फल की चिंता मत करो,   
सेवा ही है सच्चा सम्मान।   निस्वार्थ सेवा ही वास्तविक आदर है।   

04   लीला का रहस्य   लीला का रहस्य   🎶✨
जीवन एक लीला, तूने सिखलाया,   तुमने सिखाया कि जीवन एक नाटक या खेल है,   
आसक्ति में क्यों मन भरमाया।   फिर यह मन मोह-माया में क्यों उलझा हुआ है?   
बांसुरी की धुन, प्रेम बरसाया,   तुम्हारी बांसुरी की धुन ने प्रेम की वर्षा की,   
हर बंधन से मुक्त कराया।   और हर प्रकार के बंधन से मुक्ति दिलाई।   

05   समरसता का दीप   समरसता का दीप   🧑�🤝�🧑⚖️
सुदामा हो या हो ग्वाल-बाल,   चाहे वह गरीब सुदामा हो या साधारण ग्वाल-बाल,   
मित्रता का हर भेद टाला।   तुमने मित्रता में हर प्रकार का भेद-भाव दूर कर दिया।   
सबको गले लगाया, दिया सहारा,   तुमने सभी को गले लगाया और सहारा दिया,   
ऊँच-नीच का भाव है खारा।   ऊँच-नीच (भेदभाव) का भाव व्यर्थ है।   

06   शरणागति का सार   शरणागति का सार   surrender: 🤲
चिंता छोड़, तू शरण में आ,   सभी चिंताएँ छोड़ दो, और मेरी शरण में आ जाओ,   
सब दुःख तेरे हो जाएँगे हवा।   तुम्हारे सभी दुःख हवा की तरह दूर हो जाएँगे।   
मुझ पर भरोसा, यह है दवा,   मुझ पर (ईश्वर पर) विश्वास करना ही सबसे बड़ी औषधि है,   
फिर क्यों जग में तू व्यर्थ गँवा।   फिर तुम क्यों इस संसार में व्यर्थ समय बर्बाद कर रहे हो?   

07   विराट का अनुभव   विराट का अनुभव   🌌🕊�
विग्रह से शुरू हो, अंत विराट,   पूजा मूर्ति से शुरू होती है, पर उसका अंत विराट (सर्वव्यापी) अनुभव में है,   
कण-कण में है तेरी ही बात।   संसार के हर कण में तुम्हारी ही उपस्थिति है।   
प्रेम और शांति का हो प्रभात,   प्रेम और शांति से भरा नया सवेरा हो,   
कृष्ण ही जीवन का है सार, तात।   हे प्रिय! कृष्ण ही जीवन का वास्तविक सार हैं।   

--अतुल परब
--दिनांक-15.10.2025-बुधवार.
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