📜 श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय २: सांख्ययोग - श्लोक ५२-'बुद्धि की यात्रा'

Started by Atul Kaviraje, October 17, 2025, 07:47:57 PM

Previous topic - Next topic

Atul Kaviraje

📜 श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय २: सांख्ययोग - श्लोक ५२
श्लोक:

यदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति ।
तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च ॥ ५२ ॥

अल्प अर्थ (Short Meaning):

जब तुम्हारी बुद्धि मोह की दलदल (भ्रम) को पूरी तरह से पार कर जाएगी,
तब तुम सुने हुए और आगे सुनने योग्य सभी विषयों के प्रति
विरक्ति (उदासीनता) प्राप्त करोगे।

✨ कविता: 'बुद्धि की यात्रा' (लंबी हिंदी कविता) ✨
✨ आरम्भ - मोह का दलदल ✨
१. कडवे

जगत ये सारा, सुंदर दिखता, माया का है ये जाल, ।
स्नेह-ममता और आसक्ति, मन को करती बेहाल ।
झूठा सुख है, क्षणिक आनंद, खिंचता जीवन में हरदम, ।
मोहकलिलं (मोह की दलदल) यह गहरा, भटकाती है ये मन तब ।।

२. कडवे

अर्जुन जैसा, शोक में डूबा, भूला अपना कर्तव्य, ।
रिश्ते-नाते, प्रेम-प्रीति का, छाया हुआ था मंतव्य ।
मोह ही है, सबसे बड़ा जो, अज्ञान का रूप धरता, ।
इससे निकलना, पार उतरना, मार्ग सही यह भरता ।।

🌟 बुद्धि की शुद्धता 🌟
३. कडवे

पर जब होती, कर्मयोग से, बुद्धिर्व्यतितरिष्यति, ।
विवेक और वैराग्य लेकर, मोह पर विजय करती ।
जैसे कमल, कीचड़ में भी, जल से नहीं है लिपटा, ।
वैसे मन यह, होता शुद्ध, ज्ञान तभी है प्रकटा ।।

४. कडवे

सत्य-असत्य, नश्वर-शाश्वत, भेद तभी वह जानती, ।
स्वर्ग के सुख को, भोग-विलास को, मिथ्या ही तब मानती ।
जो जो देखा, जो जो सुना था, जग में अच्छा लगता, ।
आत्म-सुख के, अनुभव आगे, वो सब फीका पड़ता ।।

💫 निर्वेद की प्राप्ति 💫
५. कडवे

तदा गन्तासि निर्वेदं, विरक्ति की वह शांति, ।
शाश्वत ध्रुवपद, पा लेने पर, रहती न कोई भ्रांति ।
सारी इच्छाएँ, सारी आशाएँ, स्वयं ही शांत होती, ।
तृष्णा की वह, ज्वालाएँ तब, पूर्णतया हैं सोती ।।

६. कडवे

श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च, किसी की न आस रहती, ।
वेदों में जो, कथा-पुराणों में, कही गईं सब बातें सहती ।
इस जग में, जो जो सारी, सुनी और सुननी बाकी, ।
ज्ञान के आगे, निरर्थक वो, क्योंकि क्षणभंगुर झाँकी ।।

७. कडवे

इसलिए हे पार्थ, कर्म कर तू, फल की न कर चिंता, ।
बुद्धि स्थिर कर, योग साधना से, आत्मा में आए स्थिरता ।
यही है असली, परम शांति, मुक्ति का है दरवाजा, ।
मोह त्यागकर, ज्ञानी हो जा, अनुभव सत्य का ताज़ा ।।

--अतुल परब
--दिनांक-17.10.2025-शुक्रवार.
===========================================