गुरुद्वादशी: गुरु-तत्व और समर्पण का पावन पर्व-गुरु-तत्व की महिमा-🌊, 🥳

Started by Atul Kaviraje, October 19, 2025, 08:17:45 PM

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Atul Kaviraje

गुरुद्वादशी-

गुरुद्वादशी: गुरु-तत्व और समर्पण का पावन पर्व-

हिंदी कविता - गुरु-तत्व की महिमा-

एक सुंदर अर्थपूर्ण सीधीसादी सरल तुकबंदी के साथ

चरण (Stanza)   कविता (Poem)   हिंदी अर्थ (Meaning)

1   आई द्वादशी पावन आज, श्रीपाद वल्लभ का है राज।   
दत्तात्रेय का प्रथम अवतार, ज्ञान-भक्ति का करते विस्तार।      
(प्रतीक: 📅, 🌟)   आज द्वादशी की पावन तिथि आई है, जिस पर श्रीपाद श्रीवल्लभ स्वामी का शासन है। वे भगवान दत्तात्रेय के प्रथम अवतार हैं, जो ज्ञान और भक्ति का विस्तार करते हैं।   

2   अश्विन वद्य की ये तिथि, गुरु-तत्व की अनुपम निधि।   
सौ गुना कृपा बरसती है, हर साधक की आस फलती है।      
(प्रतीक: 💯, 🙏)   आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की यह तिथि, गुरु-तत्व का एक अद्भुत खजाना है। इस दिन गुरु की कृपा सौ गुना अधिक बरसती है, जिससे हर साधक की आशा पूरी होती है।   

3   निजानंद गमन का दिन यह, गुरु-शिष्य का पावन स्नेह।   
गुरुचरित्र का करें जो पाठ, थाम लें गुरु उनके हाथ।      
(प्रतीक: 📖, 🤝)   यह गुरु का निजानंद गमन दिवस है, जो गुरु और शिष्य के पवित्र प्रेम को दर्शाता है। जो शिष्य गुरुचरित्र का पाठ करते हैं, गुरु उनके जीवन की बागडोर अपने हाथों में ले लेते हैं।   

4   चरण पादुका की हो पूजा, ज्ञान ज्योति से मिटे दूजा।   
चंदन, अक्षत, पुष्प चढ़ाओ, गुरु-भक्ति का दीप जलाओ।      
(प्रतीक: 👣, 💡)   गुरु की चरण पादुकाओं की पूजा हो, जिससे ज्ञान के प्रकाश से अन्य सब अंधकार मिट जाए। चंदन, चावल और फूल चढ़ाओ, और हृदय में गुरु-भक्ति का दीपक प्रज्वलित करो।   
5   गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु महान, गुरु ही साक्षात परब्रह्म जान।   
अहंकार को शीश नवाओ, सच्चा शिष्य बनकर दिखलाओ।      
(प्रतीक: 🕉�, 🛐)   गुरु ही ब्रह्मा, गुरु ही महान विष्णु हैं, और गुरु ही साक्षात परब्रह्म हैं, यह जानो। अपने अहंकार को उनके चरणों में झुकाओ, और सच्चे शिष्य बनकर दिखाओ।   

6   गो-माता का पूजन होता साथ, वसुबारस का पावन हाथ।   
अन्न दान से भरे भंडार, जीवन हो जाए सुख का द्वार।      
(प्रतीक: 🐄, 🎁)   इस दिन गो-माता का पूजन भी होता है, क्योंकि वसुबारस का शुभ संयोग भी है। अन्न-दान से भंडार भरते हैं, और जीवन सुख का द्वार बन जाता है।   

7   गुरु-कृपा ही मोक्ष का सार, भवसागर से करती पार।   
गुरुद्वादशी की सबको बधाई, गुरु-तत्व से मुक्ति पाई।      
(प्रतीक: 🌊, 🥳)   गुरु की कृपा ही मोक्ष का मूल है, जो हमें इस संसार रूपी सागर से पार लगाती है। गुरुद्वादशी की सबको शुभकामनाएँ, गुरु-तत्व को जानकर हमने मुक्ति प्राप्त की है।

--अतुल परब
--दिनांक-18.10.2025-शनिवार.
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