"अखंड साक्षी"-

Started by Atul Kaviraje, October 19, 2025, 08:53:33 PM

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Atul Kaviraje

"स्वयं को सदैव और सर्वत्र स्मरण रखें।"
-जी.आई.गुरजिएफ-जॉर्ज इवानोविच गुरजिएफ-ग्रीको-अर्मेनियाई रहस्यवादी और दार्शनिक।

📜 हिंदी कविता: "अखंड साक्षी"-

Stanza 1: The Command (आदेश)
भीड़ भरी गलियों के शोर के बीच,
अव्यवस्था और उत्तेजना के मध्य,
एक धीमी आवाज उठती है, गहरी और कोमल,
"आपको रखनी है उपस्थिति की शपथ।"

Stanza 2: The Inner Observer (आंतरिक द्रष्टा)
न सिर्फ विचार, न सिर्फ भावना,
बल्कि कुछ शुद्ध, स्व-प्रकट होने वाला।
"मैं" की एक अनुभूति, एक देखती हुई रोशनी,
जो दिन को देखती है और रात का स्वामी है।

Stanza 3: The Daily Practice (दैनिक अभ्यास)
जब क्रोध भड़कता है, एक अचानक आग,
या परिस्थिति पूरी करती है इच्छा,
पीछे हटो और देखो भीतर का नाटक,
बिना न्यायाधीश के, बिना पाप के।

Stanza 4: The Sacred Pause (पवित्र विराम)
सांसों के बीच, एक स्थान तुम पाते हो,
मन के लिए एक मौन शरणस्थली।
एक पल का विराम, एक सचेत कृपा,
समय और स्थान में अपने आप को पाने के लिए।

Stanza 5: The Unchanging Core (अपरिवर्तनीय सार)
तुम वह भूमिका नहीं हो जो तुम निभाते हो,
तुम वह शब्द नहीं हो जो तुम कहते हो।
तुम द्रष्टा हो, शांत और स्थिर,
परिवर्तनशील मानव इच्छा के पीछे।

Stanza 6: The Constant Thread (निरंतर धागा)
आनंद और दुख, हानि और लाभ के माध्यम से,
धूप के घंटों और बारिश के माध्यम से,
सोने का यह धागा, यह सचेतन "मैं,"
सभी अवस्थाओं के नीचे, यह मरता नहीं है।

Stanza 7: The Homecoming (घर वापसी)
इसलिए भीड़ में या अकेले में,
यह सत्य तुम्हारा है, और सिर्फ तुम्हारा है।
अपने आप को याद करो, और तुम देखोगे,
तुम ही चाबी हो, तुम ही मुक्त हो।

--अतुल परब
--दिनांक-19.10.2025-रविवार.
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