"सुप्रभात, सोमवार मुबारक" भाप से उठता कॉफ़ी का प्याला☕भोर का भाप से भरा प्याला-

Started by Atul Kaviraje, October 20, 2025, 10:25:51 PM

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Atul Kaviraje

"सुप्रभात, सोमवार मुबारक हो"

भाप से उठता कॉफ़ी का प्याला

☕ भोर का भाप से भरा प्याला 🌄

चरण १
एक छोटी प्याली सफेद और गोल,
इससे प्यारा दृश्य न अनमोल।
एक कोमल भाप ऊपर उठती,
सुबह के समय की शांति को मिलती।

चरण २
वह ठंडी हवा में धीरे नाचे,
एक शांत वादा, चिंता से बाचे।
एक सुगंधित धुआँ, एक धुंधला जाल,
एक सुकून जो कभी न हो बेहाल।

चरण ३
हवा में पहली गहरी खुशबू,
लाए शांत सुख और भीतर जादू।
एक सुनहरा तरल, गरम और गहरा,
जब सोई हुई हो दुनिया का हर चेहरा।

चरण ४
भाप ऊपर मुड़कर, फिर हो जाती गुम,
जैसे दिन भर की चिंताएँ हुई कम।
एक साधारण गर्माहट हाथ में ली,
सबसे बेहतरीन शुरुआत यह मिली।

चरण ५
हर घूंट के संग, गर्मी है पास,
जगाए मन को, करे सब साफ।
फुसफुसाता आराम, मजबूत और अटल,
एक अनकही कहानी, गहराई का जल।

चरण ६
एक पल ठहरा, दुनिया थमी,
सर्दी के विरुद्ध शक्ति की कमी। (भाव: सर्दी के विरुद्ध शक्ति की प्याली)
एक कोमल, सच्चा सा यह क्रम,
नए दिन के लिए फिर से हों हम।

चरण ७
तो सुगंधित भाप को उठने दो,
कोमल और भोर के नभ तले।
यह छोटी प्याली, एक प्यारी मीत,
भगाए शंका, करे डर पर जीत।

--अतुल परब
--दिनांक-20.10.2025-सोमवार.
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