"शुभ दोपहर, सोमवार मुबारक हो"-🌸 फूलों की सिम्फनी 🌈

Started by Atul Kaviraje, October 20, 2025, 10:29:21 PM

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Atul Kaviraje

"शुभ दोपहर, सोमवार मुबारक हो"

एक खूबसूरत फूलों का बगीचा पूरी तरह खिल गया है

🌸 फूलों की सिम्फनी 🌈

चरण १
दरवाज़ा खुलता है, कोमल और धीमा,
जहाँ हज़ारों रंग चमकते हैं, न सीमा।
हरे रंग की क्यारियों में, फूल उठते,
थकी हुई आँखों के लिए एक कोमल दावत जुटते।

चरण २
गहरे बैंगनी से लेकर गुलाबी लाल,
मीठी सुगंध धीरे से फैलती हर हाल।
प्रत्येक मखमली पंखुड़ी, ताज़ा और चमकीली,
रोशनी रखने वाली एक छोटी मोमबत्ती, रंगीली।

चरण ३
व्यस्त मधुमक्खियाँ भिनभिनाना करें शुरू,
प्रकृति का प्यारा काम करें, बन गुरु।
वे कप से कप तक नाचें और चुस्की लें,
अपनी छोटी टोकरियाँ भरें, खुशी से पलें।

चरण ४
कोमल हवा आहें भरना करे शुरू,
जैसे सफेद बादल धीरे-धीरे बहें, हैं रूह।
ऊँचे डंठल लयबद्ध सुंदरता में झूलते,
हर चेहरे पर मुस्कान लाते, न भूलते।

चरण ५
यहाँ मजबूत गुलाब बहुत साहस से खड़े,
सफेद और सुनहरी लिली के बगल में पड़े।
वे कोई प्रतिद्वंद्विता या संघर्ष न जानें,
बस सरल खुशी और जीवंत जीवन को मानें।

चरण ६
शांति की एक भावना बसने लगे,
बेहतरीन धातु से भी अधिक कीमती जागे।
बगीचा शांत आराम प्रदान करे,
सबसे अच्छा महसूस करने का एक आदर्श समय भरे।

चरण ७
तो हवा में साँस लें और चारों ओर देखें,
ज़मीन पर मौजूद सारी सुंदरता को परखें।
हर फूल की तरह, लंबा और सच्चा,
अपने अंदर की उज्ज्वल चमक को याद करें, यह है अच्छा।

--अतुल परब
--दिनांक-20.10.2025-सोमवार.
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