संत सेना महाराज- “कामाचा लोभी बाईल सेवेसी-कविता 📿

Started by Atul Kaviraje, October 21, 2025, 10:52:01 AM

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Atul Kaviraje

        संत सेना महाराज-

"कामाचा लोभी बाईल सेवेसी ।

म्हणे आज्ञा मशी करा तुम्ही॥

घर झाडझुड उटीतसे भांडी।

लागे चरणा तोंडी दिन झाला॥

श्वानासारिखा लोंडा घोळी पुढे।

बोले लाडेलाडे कीलवाणी॥

सेना म्हणे अशांचे तोंड पाहू नये।

वीरश्री जाये जळोनिया ॥"

📿 संत सेना महाराज - तुकांत युक्त लंबी हिंदी कविता 📿
🌀 पद १: लोभी सेवा की भूमिका 🌀
काम का लोभी, सेवा में जुटी, 🧹
कहती "क्या आज्ञा, दूं मैं तुम्ही?" 🗣�
सेवा बस एक, बहाना है खाली,
अहंकार की, ये बनावट धरती। 🎭

💫 पद २: बाह्य कर्म का दिखावा 💫
घर की सफाई, बर्तन मांजती, 🏠🍽�
दिखे श्रद्धा, पर दिल में खोट है। ❤️�🩹
चरणों में सिर, दिन भर झुकाती, 🙇�♀️🌅
पर ये नम्रता, बस एक दिखावा है। 🎪

🐕 पद ३: तुच्छ वस्तुओं का मोह 🐕
कुत्ते सा वह, गेंद के पीछे, 🐕🎾
तुच्छ कर्मों के, पीछे भागता। 🏃�♂️
मोक्ष मुक्ति का, भूल गया रास्ता,
फंस गया है, किस्मत के शाप में। 😞

🍯 पद ४: मधुर पर विषैली वाणी 🍯
बोले मीठे, प्यारे प्यारे बोल, 🍬
पर छुपे हैं, उनमें काँटे तीखे। ⚔️
ऊपर से मीठे, अंदर से विषैले,
सुनने वाले का, दिल दुखाते ये। 💔

👁� पद ५: संत का स्पष्ट संदेश 👁�
सेना कहते, "ऐसों का मुख, न देखो!" 👁�🚫
उनकी संगति का, पूर्ण त्याग कर दो। 🚷
विषैले साँप से, दूर रहो जैसे,
सावधान रहो, यही उपाय है। 🐍⚠️

💥 पद ६: वीरश्री का विनाश 💥
नहीं तो वीरश्री, जलकर हो जाती, 💨🔥
नष्ट होती, साधना की शक्ति सारी। 📉
अंतर की ज्योति, शीघ्र ही बुझ जाती,
रह जाती खाली, कर्मों की पुस्तकें। 📚

🕉� पद ७: समापन और सच्ची सेवा 🕉�**
इसलिए ये मन, रखो प्रभु के पाय, 🕉�🙏
सेवा करो प्रेम से, न आने पाए लोभ। 💖
भक्ति है देना, नहीं लेन-देन की किताब,
संत सेना का, यह अंतिम संदेश है। ✨

--अतुल परब
--दिनांक-20.10.2025-सोमवार.
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