🔱 शिव और ब्रह्मांड की रचना 🔱- कविता: शिव की लीला 🎶-🙏🏼❤️‍🩹💖🌟

Started by Atul Kaviraje, October 21, 2025, 10:55:22 AM

Previous topic - Next topic

Atul Kaviraje

🔱 शिव और ब्रह्मांड की रचना 🔱-

कविता: शिव की लीला 🎶-

चरण   हिंदी कविता   हिंदी अर्थ   इमोजी सारांश

१   शून्य से पहले थे तुम, तुम ही थे बाद में,
नाद बने डमरू के, हर एक आह्लाद में।
महाकाल नाम तेरा, काल भी चरणों में,
तेरी ही लीला प्रभु, मेरे इन प्राणों में।   हे शिव, आप शून्य (सृष्टि के पूर्व) से भी पहले थे और अंत के बाद भी आप ही रहेंगे। डमरू की ध्वनि में आप ही नाद (मूल ध्वनि) बनकर प्रकट हुए। आपका नाम महाकाल है, और समय भी आपके चरणों में है। मेरे जीवन की हर गति आपकी ही माया (लीला) है।   🌌🪈🕰�🙏🏼

२   शक्ति बिना शिव तुम, जैसे हों निष्प्राण,
शक्ति संग होते ही, करते हो कल्यान।
अर्धनारीश्वर रूप, प्रेम का है सार,
नारी-पुरुष दोनों में, तेरा ही विस्तार।   हे शिव, शक्ति (देवी पार्वती) के बिना आप प्राणहीन (निष्क्रिय) हैं। शक्ति के साथ मिलते ही आप सबका कल्याण करने लगते हैं। अर्धनारीश्वर का आपका स्वरूप प्रेम का सार है, क्योंकि स्त्री और पुरुष दोनों में आपका ही विस्तार समाया है।   ☯️♀️♂️💖

३   नटराज रूप तेरा, नृत्य है महान,
ब्रह्मा, विष्णु, महेश को, देते हो ज्ञान।
भस्म लगाते तन पे, कहते हो यह राज,
मिट्टी है ये देह तो, किस पर करें नाज।   आपका नटराज स्वरूप एक महान नृत्य है, जिससे आप त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) को ज्ञान देते हैं। शरीर पर भस्म लगाकर आप यह रहस्य बताते हैं कि यह शरीर तो मिट्टी है, फिर किस बात पर घमंड करना।   💃🏽🔥🌍🌬�

४   त्रिशूल हाथ लिए, करते हो संहार,
अज्ञान और मोह का, होता है अब पार।
विष पीकर तुमने तो, कंठ को सँवारा,
नीलकंठ नाम पाया, जग को है तारा।   हाथ में त्रिशूल लेकर आप संहार करते हैं, और अज्ञान तथा मोह को नष्ट करते हैं। संसार को बचाने के लिए विष पीकर आपने अपना कंठ नीला कर लिया। इसी कारण आपका नाम नीलकंठ पड़ा, और आपने जग का उद्धार किया।   🔱🐍💙✨

५   गंगा बसी जटा में, निर्मल है ज्ञान,
शीश पे चंद्रमा है, देते हो सम्मान।
नंदी की सवारी है, भोला तेरा मन,
तेरी दया से होता, हर एक शुभ क्षण।   आपके जटाओं में निर्मल ज्ञानरूपी गंगा बसी है, और मस्तक पर चंद्रमा शीतलता और सम्मान प्रदान करता है। नंदी आपकी सवारी है और आपका मन अत्यंत भोला है। आपकी कृपा से ही हर पल शुभ होता है।   🌊🌙🐂😊

६   कण-कण में तेरा वास, तू ही है आधार,
जड़ और चेतन में, तेरा ही स्वीकार।
मोक्ष की है इच्छा, शिव में हो जाए लय,
यही है अंतिम सत्य, तू ही है निर्भय।   हर छोटे से कण में आपका निवास है, आप ही सृष्टि के आधार हैं। निर्जीव और सजीव (जड़ और चेतन) हर वस्तु में आप ही स्वीकार्य हैं। मेरी इच्छा है कि मुझे मोक्ष मिले और मैं आप में विलीन हो जाऊँ। यही अंतिम सत्य है, और आप ही भयमुक्त हैं।



भक्ति के भाव से, जो शरण में आए,
उसके सभी दुख-दर्द, पल भर में मिटाए।
जय शिव, शंभो, भोले, यही है पुकार,
कर दो मेरे जीवन का, अब तू उद्धार।

हिंदी अर्थ:
जो कोई भी सच्चे भक्ति भाव से आपकी शरण में आता है, आप उसके सारे दुःख-दर्द पल भर में हर लेते हैं।
'जय शिव, शंभो, भोलेनाथ' यही मेरी पुकार है।
हे प्रभु, अब मेरे जीवन का उद्धार कर दीजिए।

इमोजी सारांश: 🙏🏼❤️�🩹💖🌟

--अतुल परब
--दिनांक-20.10.2025-सोमवार.
===========================================