"सुप्रभात, मंगलवार मुबारक हो"-☀️ भोर का आलिंगन 🛌

Started by Atul Kaviraje, October 21, 2025, 07:42:42 PM

Previous topic - Next topic

Atul Kaviraje

"सुप्रभात, मंगलवार मुबारक हो"

सुबह की कोमल रोशनी में एक आरामदायक बिस्तर

☀️ भोर का आलिंगन 🛌

चरण १
खिड़की का शीशा लाता एक चमक,
एक नरम सुनहरा चुंबन, एक जागता पलक। (भाव: एक जागता हुआ सपना)
रजाई पर, एक कोमल निखार,
रोशनी अब ढूंढे मेरा विश्राम-आधार।

चरण २
मेरे सिर के नीचे तकिया कोमल,
रात की लाई शांति इसमें अचल।
कंबल का वज़न, एक सुखद ठहराव,
इससे पहले कि मैं नए दिन का करूं भाव। (भाव: स्वागत)

चरण ३
बाहर की दुनिया शुरू करे अपनी आवाज़,
पर यहाँ, मीठी खामोशी का है राज।
गर्माहट का एक ठहराव, एक शांत सुकून,
पेड़ों की सरसराहट के नीचे, जज़्बों का जुनून। (भाव: शांत सुकून)

चरण ४
किरण के भीतर नाचते धूल के कण,
जैसे अँधेरे की परछाइयाँ हुईं मरण। (भाव: दूर हुईं)
नीले रंग का एक इशारा, गुलाबी रंग का एक स्पर्श,
बस सोचने के लिए एक उत्तम वर्ष। (भाव: एक आदर्श क्षण)

चरण ५
कोई अचानक हड़बड़ी नहीं, न कोई तेज़ अलार्म,
बस सुरक्षित आश्रय मिला, हर नुकसान से आराम।
सूरज सुनहरी शक्ति से ऊपर चढ़े,
और कमरे को सुबह की रोशनी से भरे।

चरण ६
आरामदायक धागे अभी भी कसकर पकड़ें,
अतीत की एक कोमल याद मुझे जकड़े।
पर इस रोशनी में, एक नई आशा है,
करने के लिए सभी प्यारी चीज़ों की भाषा है।

चरण ७
तो हवा में साँस लो और खींचो और आह भरो,
साफ़, नरम, जागते हुए आकाश के नीचे विचरो।
आराम का यह बिस्तर, मीठा और गहरा,
शांतिपूर्ण विश्राम से, नए वादे रखता है पहरा। (भाव: नए वादे पूरे करने की शक्ति देता है)

--अतुल परब
--दिनांक-21.10.2025-मंगळवार.
===========================================