सत्य का शेर-

Started by Atul Kaviraje, October 21, 2025, 10:38:47 PM

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Atul Kaviraje

सत्य का शेर-

सत्य एक शेर की तरह है; आपको उसकी रक्षा करने की ज़रूरत नहीं है। उसे आज़ाद छोड़ो; वह अपनी रक्षा स्वयं कर लेगा।

१.
जब झूठ की परछाइयाँ रेंगना शुरू कर देती हैं,
और चिंताएँ आपके मन को सोने नहीं देती हैं।
याद रखें कि सच्ची शक्ति कहाँ निहित है,
फुसफुसाहटों और झूठ से परे।

२.
क्योंकि डर आपको बता सकता है, "आपको लड़ना होगा,"
अपनी पूरी ताकत से अपना पक्ष साबित करने के लिए।
लेकिन इस सबक को जानो, साफ और उज्जवल,
प्रकाश जीतने के लिए उसे किसी ढाल की आवश्यकता नहीं है।

३.
सत्य एक शेर की तरह है, मजबूत और साहसी,
एक कहानी जिसे सुनाया जाना तय है।
आग की गर्दन और शक्तिशाली दहाड़ के साथ,
उसे किसी सलाह, और कुछ नहीं चाहिए।

४.
आपको इसकी रक्षा करने की ज़रूरत नहीं है या कोई दलील देनी नहीं है,
बस उसके स्वभाव को बेकाबू और मुक्त चलने दें।
उसे संदेह के अंधेरे पिंजरे में कैद न करें,
जीवन के महान पन्ने पर संदेश को फैलाएँ।

५.
उसे आज़ाद छोड़ो; वह अपनी रक्षा स्वयं कर लेगा और खड़ा रहेगा,
पूरे देश में संप्रभुता के साथ।
शक्तिशाली पंजा प्रहार करेगा और हटा देगा,
सभी डर के कमज़ोर ताने-बाने को।

६.
झूठ मुरझा जाएगा, फीका पड़ जाएगा, और झुक जाएगा,
एक नाजुक संरचना जो अपने अंत के करीब है।
जबकि सत्य एक ठोस चट्टान, बना रहेगा,
हर निंदात्मक प्रहार से अपरिवर्तित।

७.
तो अपनी मूल आस्था को बोलें और फिर प्रतीक्षा करें,
उसकी शक्ति को उसका भाग्य तय करने दें।
उस प्रकृति पर विश्वास करें, जंगली और महान,
शेर को किसी मदद की ज़रूरत नहीं है।

--अतुल परब
--दिनांक-21.10.2025-मंगळवार.
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