📜 श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय २: सांख्ययोग - श्लोक ५६-🌸 'स्थितप्रज्ञाचा दीप'

Started by Atul Kaviraje, October 22, 2025, 10:40:38 AM

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Atul Kaviraje

📜 श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय २: सांख्ययोग - श्लोक ५६-

दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः ।
वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते ॥ २‑५६॥

📜 श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय २: सांख्ययोग - श्लोक ५६

मूल श्लोक (Original Shloka):
दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः ।
वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते ॥ २-५६॥

छोटा अर्थ (Short Meaning):
जो दुःख में विचलित नहीं होता, सुख की इच्छा नहीं रखता और आसक्ति (राग), भय और क्रोध से मुक्त होता है, उसे स्थिर बुद्धि वाला (स्थितप्रज्ञ) मुनि कहते हैं।

🌸 'स्थितप्रज्ञाचा दीप' - विस्तृत हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation of the Poem) 🌸
🖼� आरंभ - पहला छंद (Introduction)

चरण (Pada)   कविता (Hindi Poem)   मराठी अर्थ (Meaning)
पद १   अर्जुन ने प्रश्न किया, लक्षण क्या मुनि के?   अर्जुन ने पूछा कि स्थिर योगी के लक्षण क्या हैं?
पद २   कैसी स्थिर बुद्धि, अवस्था उस ज्ञानी की?   उसकी बुद्धि स्थिर कैसी होती है, उस ज्ञानी व्यक्ति की अवस्था क्या होती है?
पद ३   कृष्ण बताते भेद, सुन मेरे प्रिय कवि तू,   श्रीकृष्ण गुप्त रहस्य बताते हैं, हे कवि, तू सुन।
पद ४   कहूँगा लक्षणों को, रहेगा शांत तू! ✨   मैं वह लक्षण बताता हूँ, जिससे तू शांत रहेगा!

🌊 दूसरा छंद - दुःख और धैर्य (Sorrow and Courage)
चरण (Pada)   कविता (Hindi Poem)   मराठी अर्थ (Meaning)
पद ५   दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः - दुःख भी यदि आया,   दुःख चाहे कितना भी आया हो,
पद ६   विचलित न हो चित्त, शांत मन में छाया।   उसका मन विचलित नहीं होता, वह मन में शांत रहता है।
पद ७   संकटों के तूफ़ाँ में, धीर न वह छोड़ता,   संकटों के तूफ़ान में वह अपना धैर्य नहीं छोड़ता,
पद ८   कर्म करे वह निरंतर, आत्मा में स्थिर होता। ⛰️   वह अपना कर्म करता रहता है और आत्मा में स्थिर होता है।

🌼 तीसरा छंद - सुख और अनासक्ति (Joy and Detachment)
चरण (Pada)   कविता (Hindi Poem)   मराठी अर्थ (Meaning)
पद ९   सुखेषु विगतस्पृहः - सुख की न रखे आशा,   उसे सुख की कोई चाहत नहीं होती,
पद १०   भोग कर भी सुखों को, मन में न हो नशा।   भोग लेने के बाद भी उसके मन पर उसका नशा नहीं होता।
पद ११   धन-मान-प्रतिष्ठा, लोभ उसको ज़रा नहीं,   संपत्ति, आदर, प्रसिद्धि, इसका उसे लोभ नहीं है,
पद १२   क्षणभंगुर चीज़ों में, लिप्त होता कभी नहीं। 💎   नश्वर वस्तुओं में वह ज़रा भी नहीं फँसता/लगता।

🔗 चौथा छंद - रागमुक्ति (Freedom from Attachment/Raga)
चरण (Pada)   कविता (Hindi Poem)   मराठी अर्थ (Meaning)
पद १३   वीतराग - राग-मोह समाप्त, आसक्ति भी मिटी,   आसक्ति और मोह समाप्त हो गए, कोई लालसा नहीं बची,
पद १४   'यह मेरा है' कहने की, भावना वह हटी।   'यह मेरा है' कहने की भावना उसके मन से हट गई।
पद १५   संबंधों में रहकर भी, अलिप्त ही वह रहे,   संबंधों में रहने पर भी वह उनसे अलग (विरक्त) रहता है,
पद १६   प्रेम-जनित दुःख, वह कभी न सहे। ❤️�🩹   आसक्ति से उत्पन्न दुःख को वह कभी नहीं भोगता/सहता।

😨 पांचवां छंद - भयमुक्ति (Freedom from Fear/Bhaya)
चरण (Pada)   कविता (Hindi Poem)   मराठी अर्थ (Meaning)
पद १७   वीतभय - मृत्यु का भय नहीं, असफलता की चिंता,   उसे मृत्यु का भय नहीं है, असफलता की चिंता नहीं है,
पद १८   लाभ-हानि उसको, न कोई पीड़ा देता।   लाभ हो या हानि, उसे कोई मानसिक पीड़ा नहीं होती।
पद १९   सत्य जाना उसने, आत्मा है अविनाशी,   उसने यह सत्य जान लिया है कि आत्मा कभी नहीं मरती,
पद २०   इसलिए ही वह मुक्त, शांति उसकी राशि। 🕊�   इसीलिए वह मुक्त है और शांति का भंडार उसके पास है।

😡 छठा छंद - क्रोधमुक्ति (Freedom from Anger/Krodha)
चरण (Pada)   कविता (Hindi Poem)   मराठी अर्थ (Meaning)
पद २१   वीतक्रोध - इच्छा भंग होने पर, क्रोध न हो मन में,   इच्छा पूरी न होने पर उसके मन में क्रोध उत्पन्न नहीं होता,
पद २२   समता बनी रहती, हर एक क्षण-क्षण में।   हर पल उसकी समभाव वृत्ति बनी रहती है।
पद २३   शांत-संयमी वृत्ति, वाणी उसकी मधुर,   उसकी वृत्ति शांत और संयमी होती है, वाणी मधुर होती है,
पद २४   विकारों पर पा लिया, आत्मा से उसने काबू। 🙏   उसने आत्मिक सामर्थ्य से विकारों पर नियंत्रण पा लिया है।

🌟 समारोप - सातवां छंद (Conclusion)
चरण (Pada)   कविता (Hindi Poem)   मराठी अर्थ (Meaning)
पद २५   स्थितधीर्मुनिः - स्थिर बुद्धि वाला यह, ज्ञानी जो होता,   स्थिर बुद्धि वाला यह ज्ञानी व्यक्ति,
पद २६   वही सच्चा 'स्थितप्रज्ञ', मुनि कहलाता।   वही सच्चा 'स्थितप्रज्ञ' मुनि के रूप में जाना जाता है।
पद २७   मन में रखें हम सब, भगवन का यह संदेश,   हम सब इस भगवत संदेश को मन में रखें,
पद २८   यही जीवन का सच्चा, शाश्वत उपदेश! 💡   यही जीवन का सच्चा और हमेशा रहने वाला उपदेश है!

हिन्दी शब्दार्थ अनुवाद (Word to Word Hindi Translation)

संस्कृत (Sanskrit)   हिन्दी (Hindi)
दुःखेषु   दुःखों में (In sorrows)
अनुद्विग्नमनाः   जिसका मन उद्विग्न न हो, विचलित न हो (Whose mind is not agitated)
सुखेषु   सुखों में (In pleasures)
विगतस्पृहः   जिसकी इच्छा समाप्त हो गई है (Who is free from desire/craving)
वीतराग   आसक्ति/मोह से मुक्त (Free from attachment)
भय   भय से मुक्त (Free from fear)
क्रोधः   क्रोध से मुक्त (Free from anger)
स्थितधीः   स्थिर बुद्धि वाला (Of steady intellect)
मुनिः   मुनि (योगी/Saint)
उच्यते   कहा जाता है (Is called)

संपूर्ण हिन्दी अर्थ (Complete Hindi Meaning):
दुःखों में जिसका मन विचलित नहीं होता, सुखों के प्रति जिसकी कामना (इच्छा) समाप्त हो गई है, तथा जो आसक्ति, भय और क्रोध से रहित है, वह व्यक्ति स्थिर बुद्धि वाला मुनि कहा जाता है।

--अतुल परब
--दिनांक-21.10.2025-मंगळवार.
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