- नारी के प्रति बुद्ध के विचार-'करुणा की धारा, प्रज्ञा की रोशनी'-

Started by Atul Kaviraje, October 22, 2025, 11:03:22 AM

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Atul Kaviraje

🎵 दीर्घ हिंदी कविता (०७ चरण) - नारी के प्रति बुद्ध के विचार-

शीर्षक: 'करुणा की धारा, प्रज्ञा की रोशनी'

क्रमांक   हिंदी कविता (चरण)   हिंदी अर्थ (Short Meaning)

१   बुद्ध के नयन में, नारी का मान,
ज्ञान की अधिकारी, पाया स्थान।
युग था कठिन, पर पथ दिखाया नया,
मुक्ति का दीप नारी के लिए जलाया।   उन्होंने नारी के लिए मुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया।

२   गौतमी माता ने जब पुकारा,
संघ का द्वार खोल, दिया सहारा।
भिक्खुनी बन चलीं, शांति की खोज में,
समाधि-ध्यान की, दिव्य रोशनी में।   वे भिक्खुनी बनकर शांति और ध्यान के दिव्य प्रकाश में चलीं।

३   मन की शक्ति, लिंग न पहचाने,
प्रज्ञा से ही तो, जग ये जाने।
थेरी गाथा ने गाया ये गीत,
मिली है मुक्ति, हुई है जग जीत।   'थेरी गाथा' में उन महिलाओं की विजयगाथा है जिन्होंने ज्ञान प्राप्त किया।

४   माँ का प्रेम है करुणा का सार,
मैत्री भावना का, यही आधार।
गृहस्थ जीवन में, वह है शक्ति,
जिससे चलती है, संसार की भक्ति।   गृहिणी परिवार की शक्ति है, जिससे संसार की व्यवस्था चलती है।

५   जन्म से कोई छोटा नहीं होता,
गुण-कर्म से ही, जीवन संवरता।
राजा को समझाया, पुत्री है श्रेष्ठ,
यदि हो गुणी वह, तो न रहे क्लेश।   बुद्ध ने राजा को उपदेश दिया कि गुणी पुत्री श्रेष्ठ होती है।

६   विद्या-ज्ञान का हो पूर्ण अधिकार,
धम्म के पथ पर, मिटा हर विकार।
उत्पलवर्णा, खेमा सी विदुषी नारी,
उपदेश दिया जो, बुद्ध को प्यारी।   उत्पलवर्णा और खेमा जैसी विदुषी नारियों ने ज्ञान प्राप्त किया और उपदेश दिया।

७   आज भी उनका दर्शन महान,
समानता का देता है पैगाम।
महिला सशक्तिकरण का यही है मूल,
करुणा की खुशबू, भिक्षुणी अनुकूल।   यही महिला सशक्तिकरण का आधार है, जो करुणा और भिक्खुनी परंपरा से जुड़ा है।

--अतुल परब
--दिनांक-22.10.2025-बुधवार.
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