श्री स्वामी समर्थ और 'प्राप्ति' और 'त्याग' का दर्शन-'त्याग और प्राप्ति का सार'-

Started by Atul Kaviraje, October 23, 2025, 12:11:03 PM

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Atul Kaviraje

श्री स्वामी समर्थ और उनका 'प्राप्ति' और 'त्याग' का दर्शन-

विषय: श्री स्वामी समर्थ: 'प्राप्ति' और 'त्याग' का समन्वय - एक व्यावहारिक आध्यात्मिक दर्शन 🕉�-

'त्याग और प्राप्ति का सार'-

१.
अक्कलकोट निवासी, स्वामी हैं समर्थ,
जिनके हर वचन में जीवन का अर्थ।
गुरु तत्व का ज्ञान दिया,
'प्राप्ति' और 'त्याग' का दिया सार। 🚩🌟

२.
डरना मत, मैं तेरे साथ हूँ,
अभय दिया, थामा हाथ हूँ।
यह विश्वास है सबसे बड़ी प्राप्ति,
जब गुरु कृपा बनी रहे साथ। 🛡�💖

३.
कामना रखो, कर्म न छोड़ो,
फल की आसक्ति से नाता तोड़ो।
ईमानदारी से कर्तव्य निभाओ,
यह त्याग है, मन न मोड़ो। 🎯🔗❌

४.
धन वैभव मिले तो दान करो,
अहंकार बोझ प्रभु को अर्पण करो।
वस्तु नहीं, मोह का त्याग करो,
गुरु कृपा से जीवन सफल बनाओ। 💰🤲

५.
नामस्मरण से चित्त शुद्ध हो,
जीवन की हर समस्या दूर हो।
'जय जय स्वामी समर्थ' है मंत्र महान,
यह जाप है सबसे बड़ी पूंजी। 🔔🧘

६.
संसार में रहकर भी वैरागी बनो,
हर भोग को प्रसाद मानो।
त्याग और भोग का समन्वय करो,
यह संतुलन गुरु वाणी है। ⚖️💡

७.
जीवन में जो कुछ है सब तुम्हारा,
अंतिम प्राप्ति मोक्ष का किनारा।
अज्ञान का त्याग कर ज्ञान धरो,
स्वामी समर्थ की कृपा सहारा। 🕊�✨

इमोजी सारांश (Emoji Summary for Poem)

📜

थीम: स्वामी/गुरु 🚩, 🌟, 🛡�

मूल मंत्र: 🙏, 🔔

त्याग/प्राप्ति: ⚖️, 🔗❌

दान/अहंकार: 🤲, 💰

अंतिम लक्ष्य (मोक्ष): 🕊�

ज्ञान/बुद्धि: 💡

--अतुल परब
--दिनांक-23.10.2025-गुरुवार.
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