हिंदी कविता: बलिप्रतिपदा का उत्सव- 🪔 दानवीर बलि की गाथा 🪔🪔🗻✨

Started by Atul Kaviraje, October 23, 2025, 12:53:06 PM

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Atul Kaviraje

बलिप्रतिपदा - शक्ति और दान का महापर्व-

हिंदी कविता: बलिप्रतिपदा का उत्सव-

🪔 दानवीर बलि की गाथा 🪔

चरण 1:
दीपावली के बाद आया,
बलिप्रतिपदा का दिन लाया।
गोवर्धन पूजा का पर्व,
सबके मन को भाया। 🪔🗻✨

अर्थ: दीपावली के बाद बलिप्रतिपदा का दिन आया। गोवर्धन पूजा का यह पर्व सबके मन को भा गया।

चरण 2:
राजा बलि थे दानवीर,
देते थे सबको धन।
वामन भगवान ने माँगा,
तीन पग भर भूमि दान। 🤴🦶📏

अर्थ: राजा बलि दानवीर थे, वह सबको धन देते थे। वामन भगवान ने तीन पग भूमि दान में माँगी।

चरण 3:
एक पग में धरती नापी,
दूजे में आकाश।
तीसरा पग सिर पर रखा,
बलि को मिला वास। 🦶🌎🪐

अर्थ: एक पग में पूरी पृथ्वी नाप ली, दूसरे में आकाश। तीसरा पग बलि के सिर पर रखा, जिससे उन्हें सुतल लोक में वास मिला।

चरण 4:
गोवर्धन पर्वत उठाया,
कृष्ण ने अपने कर में।
इंद्र के कोप से बचाया,
सबको डर से घर में। 🗻🐦☔

अर्थ: कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपने हाथ में उठा लिया। उन्होंने इंद्र के क्रोध से सभी गोकुलवासियों को बचाया, जो डर से घरों में छिपे थे।

चरण 5:
गोबर से बनाएँ पर्वत,
सजाएँ फूल-माला।
दूध-दही का भोग लगाएँ,
गाएँ भजन और गाथा। 🗻🌸🍯

अर्थ: गोबर से पर्वत बनाएँ और उसे फूल-माला से सजाएँ। दूध-दही का भोग लगाएँ और भजन व गाथाएँ गाएँ।

चरण 6:
अन्नकूट का प्रसाद,
सबमें बाँटें प्यार।
प्रकृति का करें सम्मान,
यही है संस्कार। 🍲🤝🌍

अर्थ: अन्नकूट का प्रसाद सबमें प्यार से बाँटें। प्रकृति का सम्मान करें, यही हमारा संस्कार है।

चरण 7:
मुबारक हो यह दिन,
ले प्रणाम बलि को बार-बार।
वामन भगवान की कृपा,
बनी रहे सब पर अपार। 🥳🙏🌟

अर्थ: यह दिन मुबारक हो, हम बार-बार बलि को प्रणाम करते हैं। वामन भगवान की कृपा सब पर अपार बनी रहे।

--अतुल परब
--दिनांक-22.10.2025-बुधवार.
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