अन्नकूट (गोवर्धन पूजा)- हिंदी कविता – “अन्नकूट के दिवस पर”-

Started by Atul Kaviraje, October 23, 2025, 12:58:51 PM

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Atul Kaviraje

अन्नकूट (गोवर्धन पूजा)-

हिंदी कविता – "अन्नकूट के दिवस पर"-

चारण १
भोजन‑पर्वत सजाया आज हृदय में, 🍲
प्रकृति के देवताओं को श्रध्दाय धन्य बंधन।
कृष्ण की उँगली पर उठे पर्वत का स्पंदन, 🏔�
श्रद्धा की गहराई में हम सब संग जुड़न।

हिन्दी अर्थ: आज हमने अपने हृदय में भोजन‑पर्वत सजाया है, प्रकृति को श्रद्धा के साथ बाँधकर। कृष्ण की उँगली पर गोवर्धन पर्वत का उठना हमारी श्रद्धा की गहराई का प्रतीक है, हम सभी एक से जुड़े हैं।

चारण २
किसान‑गाय‑भूमि की सेवा में हम, 🐄
उठायें हाथ आज मिल‑जुलकर।
भूख‑विरहित जीवन हो आसान,
भक्तिभाव से करें हम उद्घार। 🙏

हिन्दी अर्थ: आज हम किसान, गाय‑भूमि की सेवा में हाथ बढ़ा रहे हैं, मिल‑जुलकर। ताकि भूख‑रहित जीवन आसान हो सके, हम भक्तिभाव से उद्धार करें।

चारण ३
प्रसाद बांटकर करें बंधुत्व का संदेश, 🤝
भोजन‑पर्वत बना दें अपनत्व का संसाधन।
संसाधनों की बर्बादी से करें विमोचन,
साधारणता में छुपा है महान आभूषण। ✨

हिन्दी अर्थ: हम प्रसाद बांटकर भाईचारे का संदेश दे रहे हैं। भोजन‑पर्वत को अपनत्व का साधन बना रहे हैं। संसाधनों की बर्बादी से छुटकारा पाएं, क्योंकि साधारणता में महान मूल्य छुपा है।

चारण ४
आज दीप जलता है, उजियारा मन‑काय में, 🪔
भक्ति‑संगीत गूंजे, हर्ष‑आनंद आयें।
नववर्ष की किरण चमके हमारी राह में,
अन्नकूट का आशीर्वाद सदा साथ आयें। 🌟

हिन्दी अर्थ: आज दीप जल रहा है हमारे मन‑शरीर में उजियारा लेकर। भक्ति‑संगीत गूंज रहा है, हर्ष‑और‑आनंद आ रहा है। नववर्ष की किरण हमारी राह में चमके, और अन्नकूट का आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ हो।

--अतुल परब
--दिनांक-22.10.2025-बुधवार.
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