रोज़मेलन पूजन- हिन्दी कविता – “रोज़मेलन पूजन के दिन”-

Started by Atul Kaviraje, October 23, 2025, 12:59:36 PM

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Atul Kaviraje

रोज़मेलन पूजन-

हिन्दी कविता – "रोज़मेलन पूजन के दिन"-

चरण १
नया खाता आज खोलूं, सिंदूर‑रंगित पन्नों पर,
भक्ति‑मन से दीप जले, कर्म‑पथ हो उज्ज्वल पर।
लेखापुस्तक का स्पर्श करे, ईमान‑सत्य का संकल्प,
रोज़मेलन के इस दिन से शुरू हो सफल कलंक।

हिन्दी अर्थ: आज मैं नया खाता खोल रहा हूँ, और उस पन्नों पर सिंदूर‑रंग भी चढ़ा रहा हूँ। भक्ति‑मन से दीप जल रहा है, ताकि मेरा कार्य‑मार्ग उज्ज्वल हो। खाता‑पुस्तक के स्पर्श से मैं ईमानदारी और सत्य का संकल्प ले रहा हूँ। इस रोज़मेलन के दिन से मेरी सफलता की शुरुआत हो।

चरण २
गणेश‑लक्ष्मी को न्योता‑सदृश रखें, व्यापार‑दायित्वों में,
पुरानी गलतियों को भूलकर, नवजीवन करें सृजन में।
लेखा‑विहित क्रम हम रखें, संयम‑नियम से चालें,
रोज़मेलन की इस पूजा में, नई उम्मीदें पाले लालें।

हिन्दी अर्थ: हम गणेश‑लक्ष्मी को निमंत्रण की तरह स्वीकार करते हैं हमारे व्यापार‑दायित्वों में। पुरानी गलतियों को भूलकर हम नया जीवन सृजन में लगाते हैं। लेखा‑विहित क्रम को हम संयम‑नियम से चलते हैं। रोज़मेलन की इस पूजा में हम नई उम्मीदें संजोते हैं।

चरण ३
सहयोगियों‑ग्राहकों का धन्यवाद करें, लेखाकार को मन से स्मरण,
वित्त‑सफर में हर मदद‑हाथ को करें हम अभिनंदन।
रोज़मेलन का यही भाव है — सम्पर्क‑समर्पण का संदेश,
पारदर्शिता‑भरोसा रहे, यही हो हमारी प्रतिज्ञा सवेश।

हिन्दी अर्थ: हम सहयोगियों और ग्राहकों को धन्यवाद देते हैं, और लेखाकार को मन से याद करते हैं। वित्त‑सफर में हर मदद‑हाथ को हम अभिनंदन करते हैं। रोज़मेलन का यही भाव है — संपर्क‑समर्पण का संदेश है। पारदर्शिता और भरोसा हमारे बीच रहे, यही हमारी प्रतिज्ञा है।

चरण ४
दीप जले खाता‑पुस्तक के पास, उजाले में छुपें सब संदेह,
साक्ष्य बने पन्नों पर कर्म‑पथ का, हो सत्य‑नियम दृढ़।
रोज़मेलन पूजन से हो आज, नयी शुरुआत‑शुभ आलम,
व्यापार‑सफलता संग हो, नैतिकता‑मानवता का संगम।

हिन्दी अर्थ: दीप खाता‑पुस्तक के पास जला है, उजाले में सारे संदेह छिप गए हैं। पन्नों पर कर्म‑पथ का साक्ष्य बने, सत्य‑नियम दृढ़ हों। रोज़मेलन पूजन से आज एक नई शुभ शुरुआत हो रही है। व्यापार‑सफलता के साथ नैतिकता‑मानवता का समागम हो।

चरण ५
खाता‑पुस्तक खुलते ही संकल्प लें, झूठ‑चोरी से दूर चलें,
ईमान‑श्रम, सेवा‑भाव की राह अपनाएं, अँधेरे दिन छोड़ें।
रोज़मेलन के इस पावन आयोजन में, बस यही हो उद्देश्य,
सफलता मिले, खुशहाली हो, साथ हो मित्र‑परिवार का सहयोग।

हिन्दी अर्थ: खाता‑पुस्तक खुलते ही हम संकल्प लेते हैं कि हम झूठ‑चोरी से दूर चलेंगे। ईमानदार श्रम, सेवा‑भाव की राह अपनाएंगे, और अँधेरे दिनों को छोड़ देंगे। रोज़मेलन के इस पावन आयोजन में हमारा उद्देश्य यही है — सफलता मिले, खुशहाली हो, और मित्र‑परिवार का सहयोग साथ हो।

चरण ६
जब पन्नों में अंक‑गणना हो, तब भावनाओं‑उनका ख्याल करें,
सिर्फ लाभ‑हानि को न देखें, मानव‑मूल्य का मान करें।
रोज़मेलन का यह संदेश है — कारोबार में भी हो भक्तिप्रवेश,
व्यवसाय‑वित्त ही नहीं, चरित्र‑वित्त भी हो हमारा स्वरूपेष।

हिन्दी अर्थ: जब हम पन्नों में अंक‑गणना कर रहे हैं, तब भावनाओं और उनका ख्याल करना चाहिए। सिर्फ लाभ‑हानि को नहीं देखना चाहिए, बल्कि मानव‑मूल्य का मान करना चाहिए। रोज़मेलन का यह संदेश है — कारोबार में भी भक्तिप्रवेश हो। व्यवसाय‑वित्त ही नहीं, चरित्र‑वित्त भी हमारा स्वरूप हो।

चरण ७
पूजा‑समाप्ति पर चलें हम नए पथ पर, दीपक की ज्योति संग चलते,
रोज़मेलन की इस दिनचर्या में, सिद्धि‑शुभों को हम झलkte।
भक्ति‑भाव से व्यापार करें, मानव‑दायित्व न भूलें,
रोज़मेलन पूजन की यह धुन हो, जीवन‑सफलता की सूरत में।

हिन्दी अर्थ: पूजा‑समाप्ति पर हम नए पथ पर चलते हैं, दीपक की ज्योति के साथ। रोज़मेलन की इस दिनचर्या में हम सिद्धि‑शुभों को झलकते हैं। भक्ति‑भाव से व्यापार करें और मानव‑दायित्व न भूलें। रोज़मेलन पूजन की यह धुन हो जीवन‑सफलता की सूरत में।

--अतुल परब
--दिनांक-22.10.2025-बुधवार.
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