PINGALNAM VIKRAM SAMVAT-2082-PRAARAMBHA-🙏❤️🕯️🌿🎶🌞

Started by Atul Kaviraje, October 23, 2025, 01:01:45 PM

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Atul Kaviraje

PINGALNAM VIKRAM SAMVAT-2082-PRAARAMBHA-

"आरंभ – भक्ति‑भावपूर्ण"-

चरण 1

हाथ जोड़ कर बोलूं मैं आज,
विश्वास की लौ जले हर राज।
दिल में समर्पण का दीप जलें,
तेरे चरणों में मिले ये आज।
अर्थ: आज मैं श्रद्धा‑भाव से आरंभ कर रहा हूँ, समर्पित हृदय से।

चरण 2

मन की हलचल शांत होगी,
भक्ति‐राग में जीवन खोई।
सेवा की लकीर खींचू मैं,
प्रेम रस में कदम रोई।
अर्थ: अंदर का अशांत मन शांत होगा, भक्ति‑संग में मैं सेवा का मार्ग अपनाऊँगा।

चरण 3

चाहत‑बंधन सब भूल जाऊँ,
निर्मल भाव से देव को पाऊँ।
ना अनुमति चाहिए मुझको,
प्रेम का वृन्दंजन गाऊँ।
अर्थ: मैं अपनी इच्छाओं को छोड़ूँगा, निर्मल भावना से दिव्य को प्राप्त करूंगा।

चरण 4

अँधेरा घिरे जब चारों ओर,
तेरा नाम होगा मेरे अधिकार।
जागे आँखें, बहे अश्रु हँसकर,
भक्ति‐मधु करे संसार भार।
अर्थ: जब जीवन में अँधेरा आए, तेरा स्मरण मुझे अधिकार देगा, मेरी आँखें जाग्रत और हँसती होंगी।

चरण 5

समय थम जाए यदि क्षण में,
तेरी छाँव में पाऊँ विश्रांति।
जीवन का पथ बनूँ सुन्दर,
भक्ति‑मार्ग बने मेरी संतति।
अर्थ: यदि समय रुक भी जाए, मैं तेरी छाँव में विश्राम पाऊँगा, मेरा पथ सुन्दर बनेगा और आगे की पीढ़ी को भक्ति‑मार्ग मिलेंगा।

चरण 6

नाम नहीं बस उच्चार मेरा,
हृदय में धड़के तेरा संदेश।
समर्पित हूँ पूर्ण विश्वास से,
मिले तेरे दर्शन का वेश।
अर्थ: मेरा भक्ति सिर्फ नाम नहीं, हृदय में तेरा संदेश धड़क रहा है; मैं पूर्ण विश्वास से समर्पित हूँ।

चरण 7

आज वादा करूँ जीव से मैं,
भक्ति‑सागर में डूबूँ मैं।
जहाँ ले जाओगे पथ तुम्हारा,
वहीं खड़ा रहूँगा श्रद्धा से मैं।
अर्थ: आज मैं जीवन से वादा करता हूँ कि भक्ति‑सागर में मैं डूब जाऊँगा; जहाँ तू मुझे ले जाएगा मैं श्रद्धा सहित वहाँ खड़ा रहूँगा।

📝 कविता‑ईमोजी सारांश

🙏❤️🕯�🌿🎶🌞
अर्थ: समर्पण, प्रेम, प्रकाश, निवृत्ति, भजन‑संगीत, आनंद।

--अतुल परब
--दिनांक-22.10.2025-बुधवार.
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