मोहब्बत

Started by शिवाजी सांगळे, October 23, 2025, 04:19:45 PM

Previous topic - Next topic

शिवाजी सांगळे

मोहब्बत

अब कमी नहीं खलती आदत सी हो गई हैं
प्यार व्यार,दोस्ती अब दहशत सी हो गई हैं

जब से संभाला खुद को,होकर जुदा तुमसे
ज़िन्दगी को अब बडी फुरसत सी हो गई हैं

यारी जबसे गहरी हुयी सोचकर किताबों से
जानने ईन्सानों को सहुलियत सी हो गई हैं

दिखाई हर राह ने नयी मंजिल चलते चलते
माना उम्र के मोड पर खिदमत सी हो गई हैं

बोझ नहीं लगता इस विराने मे अकेले होते
शायद अकेलेपन से, मोहब्बत सी हो गई हैं

©शिवाजी सांगळे 🦋 papillon
संपर्क: +९१ ९५४५९७६५८९
©शिवाजी सांगळे 🦋papillon
संपर्क: +९१ ९५४५९७६५८९