"सुप्रभात, शुभ गुरुवार मुबारक हो"भोर में एक शांत जंगल 🌲 भोर के जंगल का सन्नाटा

Started by Atul Kaviraje, October 23, 2025, 09:43:58 PM

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Atul Kaviraje

"सुप्रभात, शुभ गुरुवार मुबारक हो"

भोर में एक शांत जंगल

🌲 भोर के जंगल का सन्नाटा 🌅

चरण १
जंगल गहरी छाया में इंतज़ार करे,
जब तक सभी सोते प्राणी विश्राम करें।
ज़मीन पर एक शांत, गहरा सन्नाटा,
इससे पहले कि नए दिन का प्रकाश हो टाटा। (भाव: आए)

चरण २
फिर पत्तों के बीच से, एक कोमल रेखा,
सूरज अपनी सुनहरी झाँकी को देखा।
यह छाल को सुनहरे रंग से रंगे,
और सुबह की ओस से दुनिया को जगे।

चरण ३
कोहरा नीचे लटका, एक भूतिया श्वेत,
जैसे अँधेरा प्रकाश को दे अपनी भेट।
प्राचीन पेड़ स्थिर और लम्बे खड़े हैं,
और देखें कि नरम रोशनी सभी पर पड़े हैं।

चरण ४
एक रॉबिन गाए अपना पहला स्पष्ट सुर,
एक शांत खुशी निकले उसके गले से दूर।
एकमात्र आवाज़ प्रकृति की ही यहाँ,
जहाँ शांति और सन्नाटा बनाते हैं आसमाँ। (भाव: सिंहासन)

चरण ५
काई चमके, फ़र्न धीरे से खुलें,
सोने से कहीं अधिक कीमती नज़ारा मिलें।
नींद में डूबी परछाइयाँ सिकुड़ने लगें,
जैसे ही जंगल का जीवन हलचल करें। (भाव: जागने लगे)

चरण ६
हवा ताज़ा है, एक शुद्ध करने वाला लेप,
सभी सांसारिक नुकसान से सुरक्षित है शेप। (भाव: आश्रय)
रुकने, साँस लेने और प्रार्थना की जगह,
और आने वाले दिन का स्वागत यहाँ सज़ा।

चरण ७
भोर पूरी तरह से फूटती, उज्ज्वल और मजबूत,
जहाँ हर आत्मा अपनापन महसूस करे मज़बूत।
यह शांत जंगल, निर्मल और गहरा,
एक गंभीर वादा है जिसे यह रखेगा पहरा। (भाव: निभाएगा)

--अतुल परब
--दिनांक-23.10.2025-गुरुवार.
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