परिदृश्य का सबक- पर्वत की तरह अडिग रहो, और महान नदी की तरह प्रवाहित होओ।-

Started by Atul Kaviraje, October 23, 2025, 10:34:04 PM

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Atul Kaviraje

परिदृश्य का सबक-

पर्वत की तरह अडिग रहो, और महान नदी की तरह प्रवाहित होओ।

१.
जब संकट की हवाएँ चलना शुरू कर दें,
और अराजकता नीचे मँडराने लगे।
पर्वत की तरह अडिग रहो, गहरा और विशाल,
एक धैर्यवान रूप जो हमेशा बने रहने के लिए बना है।

२.
तूफानों को अपने चेहरे पर ज़ोर से टकराने दो,
और भीतर एक शांत स्थान खोजो।
सबसे तेज़ पुकार के सामने दृढ़ खड़े रहो,
एक स्थिर उपस्थिति, कभी न गिरो।

३.
लेकिन जब रास्ता अवरुद्ध और तंग हो,
और भारी परछाइयाँ प्रकाश को छिपाती हैं।
हमेशा के लिए जमे मत रहो,
गति का समय आ गया है।

४.
और एक महान नदी की तरह प्रवाहित होओ, मजबूत और चौड़ी,
हर चुनौती को अपनी लहर बनने दो।
चट्टानों और घाटियों से गुज़रो, कभी न रुको,
हमेशा आज़ादी और मुक्ति की तलाश करो।

५.
नदी एक अनजाना रास्ता खोज लेती है,
यह अपने उद्देश्य को हमेशा तीव्र रखती है।
यह बिना संघर्ष के झुकती और घूमती है,
अंधेरे को प्रकाश में बदल देती है।

६.
अडिगता और धारा का मिश्रण करो,
एक संतुलित चमक का जीवन जीने के लिए।
अपनी पवित्र ज़मीन को बनाए रखने की ताकत,
उद्देश्य मिलने पर बदलने की इच्छा।

७.
तो अपनी आत्मा को, गहरा और सच्चा, स्थिर करो,
और अपने कार्यों को नए सिरे से चलने दो।
दुनिया को देखने के लिए शांत खड़े रहो,
और महत्वपूर्ण ऊर्जा के साथ आगे बढ़ो।

--अतुल परब
--दिनांक-23.10.2025-गुरुवार.
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