अस्तित्व का अंधा कोना-

Started by Atul Kaviraje, October 23, 2025, 10:37:34 PM

Previous topic - Next topic

Atul Kaviraje

अस्तित्व का अंधा कोना-

D. H. Lawrence के कथन पर आधारित:
"जो आँख नहीं देखती और जिसे मन नहीं जानता — वह अस्तित्व में नहीं होता।"

1. 👁��🗨�

दुनिया खुलती है, अनंत स्थान,
समय और जगह से परे विधान।
पर दृष्टि न पाए उसका निशान,
तो मानव के लिए नहीं कोई प्रमाण।

🕊� अर्थ: जो हम नहीं देखते, उसे हम अक्सर असत्य या अस्तित्वहीन मान लेते हैं।

2. 🧠

मन है पिंजरा, दीवारों से घिरा,
जो भीतर आया, वही ठहरा तिरा।
जो सीमा से बाहर, अनजाना डेरा,
वो बस शून्य है, बारम्बार घेरा।

🧩 अर्थ: हमारी चेतना सीमित है; हम केवल वही जानते हैं जो हमारी समझ में आया है।

3. 🌌

तारे जलते हैं लाखों साल,
आशा-भय से परे उनका जाल।
यदि दूरबीन न मिटाए जाल,
तो उनका प्रकाश रहे बेहाल।

🌠 अर्थ: यदि हम साधन न प्रयोग करें, तो दूर की वस्तुएँ हमारी चेतना में नहीं आतीं।

4. 🕊�

अनदेखी खुशी, गहरा दुःख,
छाया के रहस्य, मौन सुख।
अज्ञान सोया, मौन मुख,
न वचन सुने, न पाए सुख।

🌑 अर्थ: जब तक हम अनजान हैं, अनदेखी भावनाएँ या सत्य हमें प्रभावित नहीं करते।

5. 🗝�

जानना ही देना अस्तित्व का मान,
दृष्टि से होता सृष्टि का ज्ञान।
शून्य से मुक्त होता इंसान,
जब मन करे स्वीकृति प्रदान।

🔑 अर्थ: किसी वस्तु को जानना ही उसे हमारे लिए वास्तविक बनाता है।

6. 🚧

खुले नयनों से दुनिया बनाओ,
सत्य की खोज में कदम बढ़ाओ।
आसमान से आगे जाओ,
नव यथार्थ को आकार दो।

🌈 अर्थ: हमें अपने दृष्टिकोण को विस्तृत कर नई सच्चाइयाँ खोजनी चाहिए।

7. ✨

जो खोजें, जो पाएँ मन के पार,
अनजाने जग से हो इजहार।
दृष्टि बढ़ाओ, ज्ञान विस्तार,
मानव का चमत्कार साकार।

🌍 अर्थ: जितना अधिक हम सीखते हैं, उतना ब्रह्मांड का अद्भुत रूप हमारे समक्ष प्रकट होता है।

🇮🇳 हिंदी अनुवाद (Hindi Translation)

अस्तित्व का अंधा कोना (Astitva Ka Andha Kona)-

डी. एच. लॉरेंस के उद्धरण पर आधारित:
"जो आँख नहीं देखती और मन नहीं जानता, वह अस्तित्व में नहीं है।"

Stanza No.   हिंदी कविता (Hindi Kavita)   हिंदी अर्थ (Hindi Meaning)

१   दुनिया फैली है, एक असीम स्थान, समय और जगह के छोर से दूर महान।   जो हम नहीं देखते, उसे हम अस्तित्वहीन मान लेते हैं।
२   मन है एक पिंजरा, दीवारों का वास, यह रखता है बस जो इसके अंदर पास।   हमारा मन सीमित है; जो बाहर है, वह हमारे लिए शून्य है।
३   तारे जल सकते हैं लाखों साल, हमारी सारी आशाओं और भय से बेहाल।   यदि हम साधन न प्रयोग करें, तो दूर की वस्तुएँ हमारी चेतना में नहीं आतीं।
४   न देखा हर्ष, गहरा दुःख है, वह रहस्य जो छाया रखती है।   जब तक हम अनजान हैं, छिपे भाव या तथ्य हमारे लिए निष्क्रिय रहते हैं।
५   जानना है किसी को अस्तित्व देना, दृष्टि और देखने का सरल लेना।   किसी चीज़ को जानना ही उसे हमारे लिए वास्तविक बनाता है।
६   तो अपनी दुनिया खुली आँखों से बनाओ, और सत्य को खोजो जो अक्सर छिपा पाओ।   हमें खुला दिमाग रखकर नई सच्चाइयाँ तलाशनी चाहिए।
७   क्योंकि जो हम खोजते और जो पाते, वह अनजाने विश्व को पीछे हटाते।   जितना हम सीखते हैं, उतना अज्ञात का क्षेत्र घटता जाता है।

--अतुल परब
--दिनांक-23.10.2025-गुरुवार.
===========================================