मानव-पशु संघर्ष: समाधान और सह-अस्तित्व-'जंगल के हम राही'-🌳🐅🤝🕊️💡

Started by Atul Kaviraje, October 24, 2025, 11:13:18 AM

Previous topic - Next topic

Atul Kaviraje

मानव-पशु संघर्ष: समाधान और सह-अस्तित्व-

हिंदी कविता - 'जंगल के हम राही'-

चरण (Stanza)   कविता (Poem)   हिंदी अर्थ (Meaning)

01   मानव तू क्यों जंगल का घर, तोड़ने चला है?
पशुओं का संसार अब, तेरे द्वारे पर खड़ा है।
जगह सिमटी, आहार घटा, रास्ता हुआ अवरुद्ध,
तभी तो यह जीव आया, करने को यह युद्ध।   हे मानव, तू क्यों जंगल के घर को तोड़ने के लिए निकला है?
वन्यजीवों की दुनिया अब तेरे दरवाज़े पर आ गई है।
उनके रहने की जगह सिकुड़ गई, भोजन कम हो गया, और रास्ता रुक गया,
तभी तो यह जीव (वन्यजीव) यह संघर्ष करने के लिए आया है।

02   हाथी चलते झूमकर, पर राह न उनको मिलती,
खेतों की हरियाली देख, भूख उनकी है खिलती।
बाघ दहाड़े रात भर, पर शिकार नहीं मिलता है,
गुस्से में वो फिर शहर, बस्ती में ही फिसलता है।   हाथी मस्ती में चलते हैं, पर उन्हें अब राह (रास्ता) नहीं मिलती,
खेतों की हरियाली देखकर उनकी भूख बढ़ जाती है।
बाघ रात भर दहाड़ता है, पर उसे शिकार नहीं मिलता है,
गुस्से में आकर वह फिर शहर या बस्ती की ओर भटक जाता है।

03   संरक्षण नहीं सिर्फ़ काग़ज़ पर, ज़मीं पर लाना होगा,
गलियारे को बचाकर, एक पुल बनाना होगा।
खाइयों की दीवारें, और फेंसिंग लगाओ तुम,
चेतावनी की घंटी से, सबको अब जगाओ तुम।   संरक्षण (Conservation) केवल कागज़ों पर नहीं, उसे ज़मीन पर उतारना होगा,
वन्यजीवों के रास्ते को बचाकर, एक सेतु (पुल) बनाना होगा।
खेतों के चारों ओर खाइयों की दीवारें और बाड़ (फेंसिंग) लगाओ तुम,
चेतावनी की घंटी से, अब सभी लोगों को जागरूक करो तुम।

04   शिकायत नहीं, सहूलियत दो, मुआवज़ा जल्दी पाओ,
पशु को भी जीने का, हक़ है, यह बात समझाओ।
जंगल उनका घर है, न करो तुम अतिक्रमण,
तभी धरती पर संभव है, प्रेम भरा समागम।   शिकायतें करने के बजाय, सुविधाएँ दो, और मुआवज़ा (Compensation) जल्दी प्राप्त करो,
पशु को भी जीने का अधिकार है, यह बात सभी को समझाओ।
जंगल उनका घर है, तुम उस पर कब्ज़ा मत करो,
तभी इस धरती पर प्रेम से भरा मिलन संभव है।

05   जंगल से है जीवन, और जीवन से है इंसान,
यह संतुलन टूटेगा तो, होगी सब की ही हानि।
टेक्नोलॉजी से करो मदद, जीपीएस का हो प्रयोग,
तभी टलेगा यह संघर्ष, मिटेगा यह वियोग।   जंगल से ही जीवन है, और जीवन से ही मनुष्य है,
यह संतुलन टूटेगा तो, सबकी ही हानि होगी।
तकनीक से मदद करो, जीपीएस का इस्तेमाल करो,
तभी यह संघर्ष टलेगा, और यह अलगाव खत्म होगा।

06   पशु भी शांत हैं जब तक, न तुम उन्हें डराओगे,
पानी-चारा जंगल में, जब उनको दिलाओगे।
सोच बदलो, व्यवहार बदलो, लाओ नया विचार,
तभी फैलेगी इस धरती पर, अमन-शांति की बहार।   पशु भी तब तक शांत रहेंगे, जब तक तुम उन्हें डराओगे नहीं,
जब तुम उन्हें जंगल में पानी और चारा उपलब्ध कराओगे।
अपनी सोच बदलो, अपना व्यवहार बदलो, एक नया विचार लाओ,
तभी इस धरती पर शांति और सुकून का माहौल फैलेगा।

07   जंगल के हम राही, और राही हैं ये जीव,
मिलकर जीना है सबको, यह जान लो तुम सीख।
तभी बजेगी शहनाई, सह-अस्तित्व की प्यारी,
बनेगी अपनी यह दुनिया, एक सुन्दर फुलवारी।   हम भी जंगल के यात्री हैं, और ये जीव भी यात्री हैं,
सभी को मिलकर जीना है, यह सीख तुम जान लो।
तभी सह-अस्तित्व की प्यारी धुन बजेगी,
और अपनी यह दुनिया एक सुंदर फुलवारी (बगीचा) बन जाएगी।
कविता सारांश (Emoji Summary): 🌳🐅🤝🕊�💡

--अतुल परब
--दिनांक-23.10.2025-गुरुवार.
===========================================