यमपूजन / यमतर्पण / अरघ्यदान-

Started by Atul Kaviraje, October 24, 2025, 11:16:19 AM

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Atul Kaviraje

यमपूजन / यमतर्पण / अरघ्यदान-

चरण १
जल लूँ मैं तर्पण, पूर्वजों को स्मरण करें 💧
जल घ्यावा मी तर्पणासाठी, पूर्वजांना स्मरण करूया
दीप जलें दक्षिण दिशा में, यमराज को प्रणाम करें 🪔
दीप जळो दक्षिण दिशा मध्ये, यमराजांना प्रणाम करूया
रक्त‑रिश्तों की डोर मजबूत हो जाए आज 🤝
रक्त‑नात्यांची दोर मजबूत होऊ दे आज
जीवन‑मृत्यु के चक्र में, भक्ति की धारा बह जाए सदा।
जीवन‑मृत्यु चक्रात, भक्ति‑धारा सदैव वाहो।

चरण २
स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र पहनूं, मन हो निर्मल 😊
स्नानानंतर शुद्ध वस्त्र घालू, मन निर्मळ होवो
तिल, अक्षत, जल से पूजा करूं, दिल में भक्ति पल‑पल।
तिळ, अक्षत, जलाने पूजा करू, हृदयात भक्ति पल‑पल।
संक्रमण का यह समय, हमें जीवन का पाठ सिखाए 📜
परिवर्तनाचा हा वेळ, आपल्याला जीवनाचा पाठ शिकवो
तर्पण‑सेवा से बंधें हम‑तू, संग अब नई शुरुआत करें।
तर्पण‑सेवेने आपण‑आपलं बंधन वाढवू, आता नवीन प्रारंभ करूया।

चरण ३
दीपक की लौ झिलमिलाए, अँधेरा दूर करे 🔥
दीपकाची ज्वाला झिलमिलो, अंधार दूर करो
यमराज की कृपा से, जीवन में उजाले भरे।
यमराजांच्या कृपेने, जीवनात उजळ भरु दे।
भय‑अनिश्चितता मिटे, आत्मा को मिले विश्वास 🕊�
भय‑अनिश्चितता मिटो, आत्म्याला विश्वास लाभो
तर्पण‑कर्म से मिलें हमें, खुशियों के नए सुर।
तर्पण‑कर्माने आपल्याला मिळो, आनंदाचे नवीन सुर।

चरण ४
पूरा परिवार शामिल हो, भावनाओं का मिलन हो 🙌
संपूर्न कुटुंब सहभागी होवो, भावना मिलन होवो
पितृ‑श्रद्धा, भक्ति‑संस्कार, हर दिल में उल्लास हो।
पितृ‑श्रद्धा, भक्ति‑संस्कार, प्रत्येक हृदयात आनंद होवो
यमपूजन की इस बेला में, बंधन गहराई ले लें 🤲
यमपूजनाच्या या वेळेत, बंधन गहिरे घेऊया
एक दूसरे का हाथ थामें, नए संकल्प मिल बँध लें।
एकमेकांचा हात धरूया, नवीन संकल्प घेऊन बंधूया।

चरण ५
सचेत रहें हम जीवन में, क्योंकि मृत्यु की धारा अज्ञात ⏳
सजग राहू आपण जीवनात, कारण मृत्युची धारा अज्ञात आहे
पर हृदय में भक्ति हो, तो भय से न रहें परे।
पण हृदयात भक्ति असेल, तर भीतीपासून दूर राहूया
तर्पण‑योग से मिले हमें, समृद्धि और शांति का वरदान 🌿
तर्पण‑योगाने आपल्याला लाभो, समृद्धी व शांततेचा वरदान
हम उठाएँ दीपप्रमाण, उज्जवल करें अपना जीवन।
आपण उचला दीपप्रमाण, उज्जवल करू आपले जीवन।

चरण ६
सेवा‑भाव से करें हम, पूर्वजों का आशीर्वाद ग्रहण 🤝
सेवाभावाने करू आपण, पूर्वजांचा आशीर्वाद स्वीकारूया
भाई‑बहन, मित्र‑परिवार, मिलकर करें यह प्रण।
भाऊ‑बहीण, मित्र‑कुटुंब, मिळून घेऊया हे प्रण
यमराज की दिशा दक्षिण में, दीप जलाएं हम आज ➡️
यमराजांची दिशा दक्षिणे, दीप लावुया आज
प्रतीक‑रूप यह रीत बने, जीवन में हर रोज़।
प्रतीक‑रूप हि रीती बने, जीवनात दररोज।

चरण ७
उत्सव खत्म हो जाए भले, पर बंधन न टूटने पाएं 🧵
उत्सव संपो जरी, पण बंधन तुटू नये
भक्ति, तर्पण, सेवा की राह पर हम निरंतर बढ़ें 🚀
भक्ति, तर्पण, सेवेच्या मार्गावर आपण निरंतर वाढूया
यमपूजन के इस दिन से, हम संकल्प लें आज ❤️
यमपूजनाच्या या दिवशी, आपण संकल्प घेऊ आज
भुक्ति‑भय‑रहित जीवन का, हम निर्माण करें सदा।
भुक्ती‑भीतीरहित जीवनाची, आपण निर्मिती करूया सदैव।

--अतुल परब
--दिनांक-23.10.2025-गुरुवार.
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