"सुप्रभात, शुक्रवार मुबारक" एक शांत झील पर सुबह का कोहरा 🌫️ मिरर लेक पर धुंध

Started by Atul Kaviraje, October 25, 2025, 12:26:54 PM

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Atul Kaviraje

"सुप्रभात, शुक्रवार मुबारक हो"

एक शांत झील पर सुबह का कोहरा

🌫� मिरर लेक पर धुंध 🦢

चरण १
झील शांत पड़ी है, काँच की चादर समान,
जहाँ सुबह के शांत पल होते रवाना। (भाव: गुजरते हैं)
पानी के ऊपर, ठंडा और गहरा,
एक फुसफुसाहट जागे जबकि सब पर है पहरा। (भाव: सोए हैं)

चरण २
चांदी-ग्रे रंग की एक नरम ओढ़नी,
जो दिन के रहस्यों को रखती है जाननी।
सुबह का कोहरा रेंगना करे शुरू,
और धीरे से सबको ढँके, यही है गुरु। (भाव: कला)

चरण ३
दूर के पेड़ हैं धुंधली परछाइयाँ,
एक चित्रित तस्वीर, शांत और सुहावनियाँ।
दुनिया खामोश, एक शांत अमन,
जहाँ चिंताएँ एक पल को हुई खत्म।

चरण ४
कोई लहर महीन सतह न तोड़े,
बस पानी उस रेखा से मिलन जोड़े।
जहाँ धुंधली हवा और झील को मिलना है,
एक शांत क्षण, ओह कितना सुंदर दिखना है।

चरण ५
एक अकेला हंस धीमी चाल में फिरे,
एक स्वप्न जैसी यात्रा धीरे से करे।
यह कोहरे को सुंदर सहजता से काटे,
हवा पर तैरता एक नज़ारा, जो सबको बाँटे।

चरण ६
सूरज ऊपर चढ़ रहा, ऊँचा और धीमा,
और नरम कोहरे को चमकाना करे सीमा। (भाव: शुरू)
चांदी सोने और सफेद में बदले,
जैसे ही प्रकृति प्रकाश का स्वागत करे, सब चले। (भाव: उत्साह से)

चरण ७
दृश्य सामने आए, कोहरा ऊपर चढ़े,
शांत जादू धीरे से अपना अंत गढ़े।
लेकिन दिल में, शांति बनी रहेगी,
व्यस्त दिन में हमें राह दिखाती रहेगी。

--अतुल परब
--दिनांक-24.10.2025-शुक्रवार.
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