"शुभ संध्या, शुक्रवार मुबारक हो"🌅 शाम के समय समुद्र तट पर एक गर्म कैम्पफ़ायर 🔥

Started by Atul Kaviraje, October 25, 2025, 12:32:33 PM

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Atul Kaviraje

"शुभ संध्या, शुक्रवार मुबारक हो"

शाम के समय समुद्र तट पर एक गर्म कैम्पफ़ायर

🌅 शाम के समय समुद्र तट पर एक गर्म कैम्पफ़ायर 🔥

समुद्री रात का केंद्र

समुद्रतट पर सांझ की एक गर्म अलाव

चरण (Stanza) | हिंदी अनुवाद (Hindi Translation)
I

सूरज धीरे ढलता है, एक अंतिम, गहरा लाल रंग,
पानी शीशे सा हो जाता है, एक अंधेरा सा दृश्य.
रेत पर एक सुनहरी चमक दिखाई देती है,
जो मंडराती सांझ के शांत भय को दूर करती है.

II

एक चट-चट की आवाज़ शुरू होती है, एक धीमी और नरम फुसफुसाहट,
जैसे सूखी लकड़ी आग पकड़ती है, और बढ़ने लगती है.
नमकीन हवा देवदार के धुएँ से छू जाती है,
यह बंधन का जादू शाम ने रचा है.

III

भूखी लपटें ऊँची उठती हैं, एक नाचता हुआ शिखर,
जो समुद्र की गहरी इच्छा में परिलक्षित होता है.
वे घेरे में बैठे चेहरों को रंगती हैं,
जैसे कहानियाँ शुरू होती हैं और शांत आवाज़ें गाती हैं.

IV

लहरों की तालबद्ध आवाज़, एक कोमल संगीत,
ठंडी और मखमली, सीपियों से भरी ज़मीन पर.
हम दूर की नावों को देखते हैं, जैसे छोटे तारे,
जो दिन की व्यस्त हलचल से बच निकली हैं.

V

मार्शमैलो भुनकर सुनहरे-भूरे हो जाते हैं,
जैसे तनाव और चिंता धीरे-धीरे कम होने लगती है.
प्रकाश का यह घेरा, एक अस्थायी घर,
जहाँ बेचैन दिल अब भटकना नहीं चाहते.

VI

अंगारे साँस लेते हैं, एक धीमी और फीकी लालिमा,
जबकि तारामंडल सिर के ऊपर इकट्ठा होते हैं.
चाँद उगता है, मखमली आकाश में एक मोती,
और ठंडी हवा की साँस के साथ समय धीमा हो जाता है.

VII

हम आग बुझाते हैं, इसकी गर्मी एक मीठी याद,
अब अपने पैरों पर उठने को मन बेताब नहीं है.
सागर हमारी खुशी की गूँज को थामे रहेगा,
अगली कोमल सांझ तक, जब फिर से यहाँ आग होगी.

--अतुल परब
--दिनांक-24.10.2025-शुक्रवार.
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