"सुप्रभात, शनिवार मुबारक हो" गुलाबी आसमान में उड़ते पंछी 💖

Started by Atul Kaviraje, October 25, 2025, 09:44:33 PM

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Atul Kaviraje

"सुप्रभात, शनिवार मुबारक हो"

गुलाबी आसमान में उड़ते पंछी

💖 गुलाबी कैनवास पर उड़ान 🕊�

चरण १
दिन हुआ समाप्त, रोशनी हुई मंद,
जैसे ही सूर्यास्त आकाश के किनारे को रंगे पसंद।
गुलाबी रंग का एक लेप, आड़ू जैसा रंग,
एक सुंदर विदाई, ताज़ा और नया ढंग।

चरण २
विशाल और खुले आकाश के पार,
पक्षियों का एक झुंड अपनी सही गति पाए।
वे अपने पंखों से गुलाबी को काटते करीने से,
उनकी घर वापसी की यात्रा, नरम और मीठी।

चरण ३
कोई जल्दबाजी में उड़ान नहीं, कोई अचानक दौड़ नहीं,
बस शाम की चमक में शांत स्ट्रोक की होड़ नहीं।
वे एक साथ चलते हैं, एक सुंदर रेखा,
आकाश के सामने, एक दिव्य दृश्य देखा।

चरण ४
प्रत्येक छोटा रूप, एक गहरी छायाकृति,
एक स्मृति जिसे दिल रात के आते ही फीका न होने दे।
हर संदेह और भय को दूर करता,
मन को शांति और सुकून से भरता।

चरण ५
वे अपने साथ आराम के विचार ले जाते,
छिपे हुए घोंसले में लौटते, गीत गाते।
उनकी स्वतंत्रता दिखती, उनकी आत्माएँ ऊँची उड़तीं,
जिस शांति की वे लालसा कर रहे, उसे ढूँढ़तीं।

चरण ६
गुलाबी रंग गहरे नीले रंग को रास्ता दे,
पल तेजी से और सच्चाई से फीके पड़ते रहे।
पंख वाले दोस्तों से एक अंतिम लहर,
जैसे ही अद्भुत गोधूलि का होता है कहर। (भाव: समापन)

चरण ७
पक्षियों की तरह हम अपनी जगह के लिए तरसें,
अपनी शांति खोजने, अपनी गति को परसें। (भाव: निर्धारित करें)
उनकी उड़ान और रंग को याद करते हुए,
हमें आगे बढ़ने के लिए नई आशा मिलती है, प्यार से।

--अतुल परब
--दिनांक-25.10.2025-शनिवार.
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